नागरिकों की मौत मामले में मेजर के खिलाफ एफआईआर रद्द करने की याचिका पर सुनवाई सोमवार को

नागरिकों की मौत मामले में मेजर के खिलाफ एफआईआर रद्द करने की याचिका पर सुनवाई सोमवार को

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने 12 फरवरी को इस मामले की सुनवाई करने का फैसला किया।

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय मेजर आदित्य कुमार के पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करने के लिए शुक्रवार को राजी हो गया। जम्मू एवं कश्मीर पुलिस ने गोलीबारी की एक घटना में नागरिकों की जान लेने के आरोप में मेजर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जिसे खारिज कराने के लिए उनके पिता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ता की वकील ऐश्वर्य भाटी द्वारा मामले की अविलंब सुनवाई की मांग के बाद मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने 12 फरवरी को इस मामले की सुनवाई करने का फैसला किया।

27 जनवरी की है घटना

10 गढ़वाल राइफल्स के मेजर कुमार और अन्य सैनिकों पर खुलेआम गोलीबारी करते हुए तीन नागरिकों को उस समय गंभीर रूप से घायल कर देने का आरोप है, जब 27 जनवरी को शोपियां जिले में गनोवपोरा गांव के पास भीड़ ने सेना के काफिले पर पत्थरबाजी करते हुए हमला किया था। वकील ऐश्वर्य भाटी द्वारा गुरुवार को दायर याचिका में आदित्य के पिता लेफ्टिनेंट कर्नल करमवीर सिंह ने कहा कि इस प्राथमिकी से सैन्य कर्मियों का अपनी ड्यूटी के निर्वहन के प्रति मनोबल गिरेगा। याचिका में कहा गया है, "जिस तरह से प्राथमिकी दर्ज की गई और राज्य के राजनीतिक नेतृत्व व शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे पेश किया है, यह दर्शाता है कि राज्य में हालात बेहद संकटपूर्ण हो गए हैं।

याचिका में कही गई यह बात

याचिका में कहा गया है, "ऐसी परिस्थितियों में सर्वोच्च न्यायालय में आने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अपने बेटे और खुद के मूल्यवान मूलभूत अधिकारों की रक्षा के लिए अपील करते हैं, वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत भी अपील करते हैं। याचिका में कहा गया है कि सशस्त्र बल विशेष शक्तियां कानून (अफस्पा) के तहत आने वाले इलाके में हुई इस घटना में मेजर आदित्य का नाम गलत तरीके से जोड़ा गया। याचिका में कहा गया है कि मेजर का इरादा सैनिकों और संपत्ति की रक्षा करना था और गोलीबारी बस सुरक्षित बच निकलने के मकसद से की गई थी।

 

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