केरल, यूपी समेत सात राज्य Free Vaccination के लिए तैयार, राजस्थान, एमपी, छत्तीसगढ़ में फिलहाल तय नहीं

  • पहले से खस्ताहाल राज्यों को वहन करना पड़ सकता है वैक्सीनेशन का खर्च
  • 30 करोड़ को मुफ्त कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराने पर, केंद्र ने केवल तीन करोड़ पर रजामंदी दी
  • राज्यों को 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों से उम्मीद, Free Vaccination के लिए चाहिए 35 हजार करोड़ अतिरिक्त

नई दिल्ली। देश में कोरोना टीकाकरण ( Corona Vaccination ) का काम तेजी से शुरू हो चुका है। पहले चरण के तीन करोड़ फ्रंटलाइन वारियर्स को फ्री टीका उपलब्ध कराया जा रहा है। इनके टीकाकरण काम मार्च तक पूरा होना है, उसके बाद 50 और उससे ऊपर के लोगों के टीकाकरण काम शुरू होगा।

देश में ऐसे 27 करोड़ लोगों को छांटा गया है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि इनको टीका मुफ्त मिलेगा या फिर उसकी कीमत चुकानी होगी, इसको लेकर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है। हालांकि केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, नई दिल्ली व उत्तर प्रदेश पहले ही अपने राज्य में फ्री वैक्सीन देने की घोषणा कर चुके हैं।

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जबकि बिहार ने अपने घोषणापत्र में ही फ्री वैक्सीनेशन की बात कही थी। वहीं, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य तय नहीं कर सके हैं कि वह अपने राज्यों में लोगों को वैक्सीन कैसे देंगे।

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तो 35 हजार करोड़ की अतिरिक्त जरूरत
दरअसल, ज्यादातर राज्य फ्री वैक्सीन के मुद‌्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है वैक्सीनेशन से पडऩे वाला आर्थिक बोझ। राज्य इंतजार कर रहे हैं कि केंद्र सरकार इस आर्थिक बोझ को कितना अपने कंधे पर लेगी व कितना राज्यों के कंधे पर डालेगी।

आशंका है कि राज्यों को वैक्सीन के खर्च का कुछ हिस्सा वहन करना पड़ सकता है। राज्यों की खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार विशेष अनुदान पर विचार कर सकती है। केंद्र सरकार टीके का पूरा खर्च वहन करती है तो टीकाकरण कार्यक्रम के लिए 2021-22 के बजट में अतिरिक्त 35,000 करोड़ रुपये देने होंगे।

तो राज्यों को देना होगा खर्च
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक राज्यों को टीकाकरण में आने वाले खर्च का कुछ हिस्सा देना पड़ सकता है। केंद्र निजी बाजार में टीकों की बिक्री की अनुमति भी दे सकता है, जिससे लोग और सरकारें सीधे टीका खरीद सकती हैं।

4 हजार करोड़ तक खर्च के लिए तैयार : केरल
केरल के वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने कहा कि राज्य नि:शुल्क टीकाकरण के लिए 3,000-4,000 करोड़ खर्च करने के लिए तैयार है, ताकि टीकाकरण के बाद अर्थव्यवस्था वापस जल्द सामान्य हो सके। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने टीकाकरण की योजना तैयार कर रही है। सरकार की कोशिश है कि दूसरे मद का पैसा वैक्सीनेशन में इस्तेमाल कर रुकी अर्थव्यवस्था को गति दी जाए, जिससे वापस पैसे की रिकवरी हो सके।

15 वें वित्त आयोग की सिफारिशों से उम्मीद
राज्यों को 15 वें वित्त आयोग की सिफारिशों का भी इंतजार है। फरवरी में केंद्रीय बजट में कुछ राहत की उम्मीद है। स्वास्थ्य के लिए बड़ा बजट मिलने की उम्मीद हो रही है। वहीं, पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद प्रणब सेन का मानना है कि अगर राज्यों के ऊपर वैक्सीनेशन का खर्च डाला गया तो इंफ्रास्ट्रक्चर की फंडिंग बिगड़ेगी।

उनके मुताबिक, राज्यों पर टीके का खर्च का बोझ डालने से इंफ्रास्ट्रक्चर की फंडिंग की क्षमता खराब हो जाएगी। इसका राज्यों की आर्थिक ग्रोथ पर कई गुना असर पड़ेगा। अभी प्रत्येक राज्य ने पूंजीगत व्यय पर कटौती की है। यह समस्या अगले साल तक जारी रहेगी।

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मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ केंद्र के भरोसे, राजस्थान असमंजस में
छत्तीसगढ़ -
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव का कहना है, कोरोना वैश्विक महामारी है। यह पूरे देश की आपदा है, इसलिए केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी के लिए निःशुल्क टीकाकरण की व्यवस्था करवाए। अभी हेल्थ केअर, इसके बाद फ्रंट लाइन, फिर 50 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के लोगों को वैक्सीन लगेगी। जब केंद्र टीके लगा रहा है तो फिर राज्य द्वारा खरीदी का सवाल ही नहीं उठता।

मध्यप्रदेश-
मध्यप्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान का कहना है, केंद्र सरकार अभी वैक्सीन उपलब्ध करा रही है। इसके बाद की स्थिति केंद्र की गाइड लाइन के हिसाब से बाद में स्पष्ट हो पाएगी। तीसरे फेस में केंद्र और राज्य की कुछ शेयरिंग हो सकती है।

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राजस्थान -
राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के टीकाकरण निदेशक डॉ. लक्ष्मण सिंह ओला का कहना है, अभी हमारे पास तीन चरणों की ही कार्ययोजना है। उसमें निशुल्क लगाए जा रहे हैं। चार चरणों के बाद निशुल्क लगाए जाएंगे या सशुल्क लगाए जाएंगे, इसको लेकर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।

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धीरज शर्मा
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