अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग का शिवसेना ने किया बहिष्कार

वरिष्ठ नेता संजय राउत का कहना है कि कागजों में अभी भी शिवसेना भाजपा के साथ है, मगर देश से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर वह सरकार के पक्ष में नहीं है

नई दिल्ली। अविश्वास प्रस्ताव को लेकर चर्चा के कुछ मिनट पहले ही शिवसेना ने वोटिंग का बहिष्कार कर दिया है। इस मामले में पार्टी से वरिष्ठ नेता संजय राउत का कहना है कि कागजों में अभी भी शिवसेना भाजपा के साथ है, मगर देश से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर वह सरकार के पक्ष में नहीं है। उनका कहना है कि सरकार ने बीते चार सालों में कुछ नहीं किया है। पीएम मोदी ने जो बड़े वादे किए थे,वह आज तक पूरे नहीं हो पाएं हैं। ऐसे में शिवसेना विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के साथ तो है पर वह वोटिंग में हिस्सा नहीं लेगी।

पिछले चार साल का ब्योरा दे

इससे पहले भी शिवसेना ने सरकार का समर्थन नहीं करने का संकेत दिया था। मुखपत्र सामना में पार्टी के प्रमुख उद्धव ठाकरे की ओर से बयान आया था कि इस समय देश में तानाशाही चल रही है। इसका समर्थन करने की जगह वे जनता के साथ जाना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि देश कई समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में यह सरकार के लिए जवाब देने का समय है। वह अपने पिछले चार साल के कामकाज का ब्योरा देश के सामने उपलब्ध कराए। 543 सांसदों वाली लोकसभा में इस वक्त 11 सीटें खाली हैं,यानि लोकसभा में सांसदों की मौजूदा संख्या 532 है। इस लिहाज से बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा 267 सीटों का है। फिलहाल बीजेपी के 272 सांसदों के साथ सरकार के पक्ष में कुल 295 सांसद हैं। ये आंकड़ा 313 का होता, लेकिन शिवसेना ने अपना रुख साफ करते हुए वोटिंग का बहिष्कार कर दिया है।

विरोध में 147 सांसद

उधर विपक्ष में 147 सांसद हैं। अब तक 90 सांसद अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेंगे या विरोध, ये फिलहाल साफ नहीं हो पाया है। गुरुवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उद्धव को फोन किया था। इसके बाद खबरें आईं थीं कि शिवसेना मोदी सरकार के समर्थन में वोट करेगी। लेकिन आज सामना में पार्टी ने अप्रत्यक्ष रूप से साफ कर दिया था कि वोटिंग में वो मोदी सरकार का समर्थन नहीं करेगी।

BJP
Mohit Saxena
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