स्‍टीफन हॉकिंग का निधन, बीमारी से लड़ते हुए ब्रह्मांड के रहस्‍यों से हटाया पर्दा

Dhirendra Mishra

Publish: Mar, 14 2018 10:28:18 AM (IST) | Updated: Mar, 14 2018 11:40:53 AM (IST)

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स्‍टीफन हॉकिंग का निधन, बीमारी से लड़ते हुए ब्रह्मांड के रहस्‍यों से हटाया पर्दा

भौतिक विज्ञानी और आधुनिक ब्रह्मांड विज्ञान के चमकते सितारे स्‍टीफन हॉकिंग का 14 मार्च को अपने ही घर पर निधन हो गया।

नई दिल्‍ली. आधुनिक ब्रह्मांड विज्ञान के चमकते सितारे व कैम्ब्रिज विश्‍वविद्यालय में भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर स्‍टीफन हॉकिंग अब हमारे बीच नहीं रहे। 76 साल की उम्र में 14 मार्च को उनका अपने घर पर निधन हो गया। उन्‍होंने अपने असाधारण प्रतिभा के बल पर उन्‍होंने ब्रह्मांड विज्ञान के कई रहस्‍यों से पर्दा उठाया। यही कारण है कि विश्‍व भर के भौतिक विज्ञानियों, खगोलशास्त्रियों और भौतिकविज्ञानियों के लिए वो प्रेरणास्रोत माने जाते रहे और आगे भी प्रेरणा के पुंज बने रहेंगे।

उनके बच्‍चों ने कहा, हम उनको भुला नहीं पाएंगे
हॉकिंग के बच्‍चे लुसी, रॉबर्ट और टिम ने एक बयान में कहा कि हम बहुत दुःखी हैं कि आज हमारे प्यारे पिता का निधन हो गया है। 14 मार्च को घर पर निधन के बाद उनके बच्‍चों ने जारी बयान में कहा है कि हम उन्‍हें हमेशा के लिए याद करेंगे। उन्‍हें कभी भुला नहीं पाएंगे। उन्‍होंने ब्रह्मांड के रहस्‍यों से पर्दा उठाकर दुनिया भर को चमत्‍कृत करने का काम किया। हमें गर्व हैं कि हम उनके बच्‍चे हैं। हमारा प्रयास होगा कि हम उनके पदचिन्‍हों पर चलकर बेहतर भविष्‍य के दिशा में ब्रह्मांड के अन्‍य अबूझ पहेलियों से भी पर्दा उठाएं। ताकि ब्रह्मांड की दुनिया की आगामी पीढ़ी उनके ज्ञान को विस्‍तार देने में सहायक साबित हो सकें। ये बयान उनके परिवार ने बुधवार की सुबह के शुरुआती घंटों में कैंब्रिज में अपने घर की मृत्यु की पुष्टि करते हुए एक बयान जारी किया।

बने रहे वैज्ञानिकों के प्रेरणास्रोत
हॉकिंग एक महान वैज्ञानिक और एक असाधारण व्यक्तित्‍व के धनी इंसान थे। उनके काम और उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। वो अपने पीछे ब्रह्मांड की दुनिया का विशाल विरासत छोड़ गए हैं। उन्‍होंने असाधारण प्रतिभा और ब्रह्मांड को लेकर अपनी प्रतिबद्धताओं से दुनिया भर के वैज्ञानिकों को बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। ब्रह्मांड को लेकर उनकी समझ और अनुमानों का सभी लोहा मानते हैं।
मोटर न्‍यूरॉन रोग से पीडि़त थे
1963 में 21 साल की उम्र में उन्‍हें पता चला कि वो मोटर न्यूरॉन रोग से पीडि़त हैं और ठीक से बोल नहीं सकते। इतना ही नहीं आपनी बातों को बेहतर तरीके से नहीं रख सकते हैं। उस समय डाक्‍टरों ने बताया था कि वो केवल दो साल और जीवित रह सकते हैं। लेकिन चिकित्‍सकों की भविष्‍यवाणियों को झुठलाते हुए और उसके बाद 55 और साल तक हमारे बीच रहे और ब्रह्मांड के रहस्‍यों से पर्दा उठाने में हमारी मदद की।

जानिए, एक बार उन्‍होंने क्‍या कहा था...
स्टीफन हॉकिंग ने एक बार कहा था कि मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैंने ब्रह्माण्ड को समझने में अपनी भूमिका निभाई। इसके रहस्यों से पर्दा उठाया और इस पर किए गए शोध में अपना योगदान दे पाया। मुझे गर्व होता है जब दुनिया भर के लोग उनके काम को जानना और समझना चाहते हैं। उन्‍होंने इस बात का भी जिक्र किया था कि लगभग सभी मांसपेशियों पर से में अपना नियंत्रण खो चुका हूं और अब मैं अपने गाल की मांसपेशी के जरिए, अपने चश्मे पर लगे सेंसर को कम्प्यूटर से जोड़कर ही बातचीत करता हूं।

ब्‍लैकहोल और बिग बैंक सिद्धांत को समझने में की मदद
उन्‍होंने ब्‍लैकहोल और बिग बैंग सिद्धांत को समझने में अहम योगदान दिया। उनके पास 12 मानद डिग्रियाँ हैं और अमरीका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान उन्हें दिया गया है। जब हॉकिंग ने अपने स्नातक अध्ययन शुरू किया, तो भौतिकी विज्ञानियों में ब्रह्मांड के निर्माण की प्रचलित सिद्धांतों के बारे में बहुत बहस हुई।

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