Lockdown उत्तराखंड : तेजी से बढ़े रहे सुसाइड के मामले, 4 महीने में 20 प्रतिशत लोगों ने लगाया मौत को गला

Highlights
- कोरोना वायरस (Coronavirus in india) से इस समय पूरा विश्व कांप रहा है
- इस वायरस से बचाव का सिर्फ एक ही रास्ता है और वह है खुद को घरों (Stay at Home) पर कैद कर अंदर रखना ताकि वायरस के संक्रमण से बचा जा सके
- लॉकडाउन के दौरान सुसाइड के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है

नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के चलते हुए लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से सुसाइड (Suicide in Lockdown) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। 22 मार्च से हुए लॉकडाउन (Suicide case in lockdown) से अबतक आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। कोरोना वायरस (Coronavirus in india) से इस समय पूरा विश्व कांप रहा है। इस वायरस से बचाव का सिर्फ एक ही रास्ता है और वह है खुद को घरों (Stay at Home) पर कैद कर अंदर रखना ताकि वायरस के संक्रमण से बचा जा सके। लेकिन लॉकडाउन के दौरान सुसाइड के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। आंकड़ों पर गौर करें तो उत्तराखंड (Uttarakhand) में पिछले 4 महीने के सुसाइड केस की हिस्ट्री आप देखेंगे तो इसमें 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

2 हफ्तों में बदलती तस्वीर

दरअसल उत्तराखंड में पिछले 4 महीने में सुसाइड के मामले (Suicide cases) तेजी से बढ़े हैं। खासकर पिछले 2 हफ्ते में और तेजी से तस्वीर बदली है। जब न सिर्फ शहरों से बल्कि पहाड़ी जिलों में भी लोग तनाव के चलते आत्महत्या को मजबूर हुए हैं। जानकर मानते है कि सुसाइड के पीछे बड़ी वजह तनाव है।

18 दिन में 25 मामले

आकंड़ों की बात करें तो 22 मार्च से 22 अप्रैल तक सुसाइड के उत्तराखंड में 20 मामले सामने आए हैं। जबकि 23 अप्रैल से 11 मई तक यानी 18 दिन के अंदर 25 मामले सामने आए हैं। लाॉकडाउन के पहले अगर बाद करें तो प्रदेश में जनवरी महीने में सुसाइड के केवल 12 मामले सामने आए। विशेषक बताते है कि इसमें युवाओं की संख्या ज्यादा है।

जनवरी से अप्रैल तक 187 जान गई

जानकार बताते हैं कि जनवरी से अप्रैल तक की बात करें तो 187 लोगों ने मौत को गले लगा लिया है, जिसमें पहले नंबर पर हरिद्वार है। यहां पर 27 पुरुष, 2 नाबालिग और 13 महिलाओं ने आत्महत्या की। वहीं, देहरादून में 18 पुरुष, 20 महिला और 4 बच्चों ने सुसाइड किया है। इसी तरह नैनिताल की स्थिति भी मनोवैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा रही है। आर्थिक तंगी, रिश्तों में तनाव और कैरियर में असफलता इसके पीछे बड़ी वजह है।

Ruchi Sharma
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