सुप्रीम कोर्ट विवाद : बीसीआई प्रतिनिधिमंडल चीफ जस्टिस से मिलने पहुंचा

Mazkoor Alam

Publish: Jan, 14 2018 07:18:14 PM (IST) | Updated: Jan, 14 2018 08:11:12 PM (IST)

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सुप्रीम कोर्ट विवाद : बीसीआई प्रतिनिधिमंडल चीफ जस्टिस से मिलने पहुंचा

सुप्रीम कोर्ट विवाद को हल करने की कोशिश के तहत बार काउंसिल ऑफ इंडिया रविवार को जस्टिस चेलमेश्वर के अलावा दो न्यायधीशों से मिला।

नई दिल्ली : बार काउंसिल ऑफ इंडिया का प्रतिनिधिमंडल सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे चेलमेश्वरम और सुप्रीम कोर्ट के दो अन्य जजों से मुलाकात करने के बाद अब मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा से मिलने पहुंचा है। मिली खबर के अनुसार, बातचीत जारी है और यह उम्मीद जताई जा रही है कि किसी फॉर्मूले पर सहमति बनी तो शुक्रवार से सुप्रीम कोर्ट में बना गतिरोध टूट सकता है।

इससे पहले रविवार को ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर व दो अन्य न्यायाधीशों से मुलाकात कर सुप्रीम कोर्ट में न्यायधीशों के बीच चल रहे मतभेदों पर बातचीत की। चेलमेश्वर सर्वोच्च न्यायालय में वरीयता सूची में दूसरे नंबर पर हैं और उन चार न्यायाधीशों में एक हैं, जिन्होंने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा से मतभेदों को लेकर सार्वजनिक तौर पर मीडिया के सामने आए थे।
45 मिनट चली बातचीत
बीसीआई के प्रतिनिधिमंडल ने करीब 45 मिनट तक जस्टिस चेलमेश्वर से उनके आवास पर बातचीत की। सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठतम जजों की ओर से मुख्य न्यायाधीशों को लिखे खुले पत्र के दो दिनों के बाद प्रतिनिधिमंडल जस्टिस आरके अग्रवाल और उसके बाद न्यायमूर्ति एएम खानविलकर से मिल चुका है। उसके बाद प्रतिनिधिमंडल न्यायाधीश अरुण मिश्रा से भी मिला।

शनिवार को न्यायधीशों से मिलने का लिया था निर्णय
शनिवार को ही बीसीआई ने यह निर्णय लिया था कि एक प्रतिनिधिमंडल बनाकर वह रविवार को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से मिलेगा, ताकि इस संकट का जल्द से जल्द हल निकाला जा सके। बीसीआई ने शनिवार को कहा था कि काउंसिल का सर्वसम्मति से यह मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय का यह आंतरिक मामला है और उसे उम्मीद व यकीन दोनों है कि सुप्रीम कोर्ट के जज इस मुद्दे की गंभीरता समझेंगे और ऐसी किसी भी हालत से भविष्य में बचेंगे, जिसका अनुचित फायदा राजनीतिक दल या नेता उठा सकते हैं। इससे न्यायपालिका को नुकसान पहुंच सकता है।

राजनेता न बनाएं मुद्दा
इसके साथ ही काउंसिल ने राजनीतिक दलों व राजनेताओं से न्यायपालिका की आलोचना नहीं करने व इसे मुद्दा नहीं बनाने का भी आग्रह किया। यह भी कहा कि इस तरह की किसी भी कोशिश से न्यायापालिका की स्वतंत्रता कमजोर होगी, जो कि लोकतंत्र की रक्षक है। बीसीआई के अध्यक्ष मनन मिश्रा ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि चार वरिष्ठ न्यायधीशों ने प्रेस कांन्फ्रेंस कर यह संदेश दिया कि सर्वोच्च न्यायालय में सबकुछ नहीं है। इसे आंतरिक रूप से सुलझाया जाना चाहिए था। यह एक पारिवारिक विवाद है और इसे न्यायापालिका के भीतर ही सुलझाया जाना चाहिए था।
बता दें कि शुक्रवार को चार न्यायाधीशों जस्टिस जे.चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर व जस्टिस कुरियन जोसेफ ने अदालती मामलों के आवंटन को लेकर मुख्य न्यायधीश पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि शीर्ष अदालत की प्रशासनिक व्यवस्था ठीक नहीं है।

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