समलैंगिकता पर सुप्रीम में हुई गर्मागरम बहस, जजों की भी आई टिप्पणी

समलैंगिकता पर सुप्रीम में हुई गर्मागरम बहस, जजों की भी आई टिप्पणी

बहस के दौरान जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने कहा कि प्रकृति और विकृति का सहअस्तित्व है। उन्होंने कहा कि कई प्रकार के जीवों में सेम सेक्स इंटरकोर्स देखने को मिलता है। उ

नई दिल्ली। समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बीते मंगलवार से सुनवाई चल रही है। गुरुवार को भी सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई और बकायदा कोर्ट में इस मामले पर गर्मागरम बहस हुई है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में इस बात पर बहस चल रही है कि समलैंगिकता को अपराध से बाहर किया जाए या नहीं ? गुरुवार को बहस के दौरान जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने कहा कि प्रकृति और विकृति का सहअस्तित्व है। उन्होंने कहा कि कई प्रकार के जीवों में सेम सेक्स इंटरकोर्स देखने को मिलता है। उधर, इस मामले में वकील श्याम दीवान ने कहा है कि अब समय आ गया है कि कोर्ट आर्टिकल 21 के तहत राइट टूट इंटिमेसी को जीवन जीने का आधिकार घोषित कर दे।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के पाले में डाल दी है गेंद

इससे पहले केंद्र सरकार ने बुधवार को गेंद पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के पाले में डाल दी थी। केंद्र सरकार ने धारा 377 पर कोई स्टैंड न लेकर फैसला पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दिया था। अडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार की ओर से कहा कि हम 377 के वैधता के मामले को सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ते हैं, लेकिन अगर सुनवाई का दायरा बढ़ता है, तो सरकार हलफनामा देगी। आपको बता दें कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की पांच जजों की बेंच सुनवाई कर रही है।

बहस के दौरान जजों की आई टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान जजों की टिप्पणी भी सामने आई। जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने कहा कि अपने सेक्शुअल ओरिएंटेशन की वजह से LGBT कम्युनिटी के लोगों को सेमी अबर्न और सेमी रूरल इलाकों में स्वास्थ्य सेवा हासिल करने में गैरबराबरी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि परिवार के दबाव की वजह से गे शख्स को शादी करनी पड़ती है और यह उनके बाइ सेक्शुअल होने की वजह हो सकता है। जस्टिस ने कहा कि सेम सेक्स रिलेशनशिप के अपराध होने की वजह से, इसके कई अन्य प्रभाव पड़ते हैं। जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने कहा कि नेचर में प्रकृति और विकृति का सहअस्तिव है। ऐसे हजारों जीव हैं जो सेम सेक्स इंटरकोर्ट करते हैं।

इंदू मल्होत्रा की इस टिप्पणी पर जवाब देते हुए अडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हिंदू दार्शनिक ग्रंथों में प्रकृति और विकृति के सहअस्तित्व की बात दार्शनिक और आध्यात्मिक संदर्भ में की गई है। उन्होंने कहा कि इसे सेक्शुअलिटी और होमोसेक्शुअलिटी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

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