सुप्रीम कोर्ट मराठा आरक्षण पर बुधवार को सुना सकता है बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले सुनवाई करते हुए कहा था कि 2020-21 के दौरान नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में प्रवेश में मराठा कोटा नहीं रहेगा। साथ ही कोर्ट ने इस मामले को संवैधानिक बेंच के पास भेज दिया था।

नई दिल्ली। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर लंबे समय तक आंदोलन होता रहा है अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट बुधवार (5 मई) को अहम फैसला सुना सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट 5 मई (बुधवार) को मराठा आरक्षण पर अपना फैसला सुनाएगी। न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीश की संविधान पीठ फैसला सुनाएगी।

इससे पहले मराठा आरक्षण से जुड़े उन तमाम याचिकाओं पर सुनवाई की थी, जिनमें मराठा आरक्षण की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। शीर्ष अदालत ने 26 मार्च को याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

यह भी पढ़ें :- Maratha Reservation : महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से की बड़ी अपील, तत्काल गठित हो संवैधानिक बेंच

बता दें कि, इस नियम के तहत महाराष्ट्र में नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में प्रवेश में मराठा कोटा दिए जाने का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट ने इस सरकार के इस फैसले पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा था कि 2020-21 के दौरान नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में प्रवेश में मराठा कोटा नहीं रहेगा। साथ ही कोर्ट ने इस मामले को संवैधानिक बेंच के पास भेज दिया था।

आपको बता दें कि यदि कल सुप्रीम कोर्ट मराठा आरक्षण पर फैसला सुनाता है तो इससे महाराष्ट्र की सियासत के लिए काफी अहम होगा। मराठा आरक्षण लंबे समय से महाराष्ट्र की राजनीति का एक अहम हिस्सा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

आपको बता दें कि महाराष्ट्र में मराठा समुदाय की संख्या सबसे अधिक है, इसलिए तमाम राजनीतिक पार्टियां आरक्षण की मांग करती रही हैं। आरक्षण के लिए मराठा समुदाय के लोग कई बड़े आंदोलन किए हैं। आखिरकार नंवबर 2018 में महाराष्ट्र विधानसभा में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग अधिनियम 2018 को पारित किया गया।

यह भी पढ़ें :- Supreme Court का बड़ा फैसला, सरकारी नौकरियों व शैक्षिक संस्थानों में 2020-21 सत्र के लिए मराठा आरक्षण पर रोक

इसके तहत महाराष्ट्र में सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में मराठाओं को 16 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान था। लेकिन इस आरक्षण के साथ महाराष्ट्र में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत की सीमा से ऊपर चला गया। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए।

सरकार के इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि सरकार का ये फैसला इंदिरा साहनी मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन करता है। हालांकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सरकार के पक्ष में सुनाया था और कहा था कि राज्य विशेष परिस्थितियों में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण दे सकते हैं। इसके बाद हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसपर अब बुधवार को फैसला सुनाया जाएगा।

Anil Kumar
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned