Lockdown में निजी स्कूलों की फीस माफ करने को लेकर Supreme Court ने दिया जवाब

-Supreme Court on Petition of Private School Fees: निजी स्कूलों की फीस माफी की मांग कर रहे अभिभावकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है।
-सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court Hearing ) ने शुक्रवार को निजी स्कूलों की तीन महीने की फीस ( School Fees ) माफ करने और रेगुलेटरी तंत्र बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है।
-कोर्ट ने कहा कि राज्य की स्थिति अलग-अलग होती है। इसके लिए याचिकाकर्ता संबंधित राज्य में हाईकोर्ट ( High Court ) में याचिका दायर कर सकते हैं।

नई दिल्ली।
Supreme Court on Petition of Private School Fees: निजी स्कूलों की फीस माफी की मांग कर रहे अभिभावकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court Hearing ) ने शुक्रवार को निजी स्कूलों की तीन महीने की फीस ( School Fees ) माफ करने और रेगुलेटरी तंत्र बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि राज्य की स्थिति अलग-अलग होती है।

इसके लिए याचिकाकर्ता संबंधित राज्य में हाईकोर्ट ( High Court ) में याचिका दायर कर सकते हैं। बता दें कि 8 राज्यों के अभिभावकों ( Patients ) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिसमें लॉकडाउन ( Lockdown ) के दौरान निजी स्कूलों की तीन महीने की फीस माफ करने और नियमित स्कूल शुरू होने तक फीस रेगुलेट किये जाने की मांग की गई थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

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8 राज्यों के अभिभावकों की थी मांग
बता दें कि कोरोना महामारी के चलते देशभर में लाॉकडाउन लागू किया गया। इस दौरान सभी स्कूलों को भी बंद किया गया। अभिभावकों का कहना है कि रोजगार बंद होने से वह बच्चों की फीस देने में असमर्थ है। बता दें कि दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हरियाणा, गुजरात, पंजाब, ओडिशा, राजस्थान और मध्य प्रदेश के अभिभावकों ने यह याचिका दायर की गयी थी। याचिका में लॉकडाउन के दौरान निजी स्कूलों की तीन महीने अप्रैल से जून तक की फीस माफ करने और नियमित स्कूल शुरू होने तक फीस रेगुलेट किये जाने की मांग की गई। साथ ही फीस न चुकाने की स्थिति में बच्चों को स्कूल से न निकाला जाए, इसकी भी मांग गई। याचिका में कहा गया ऑनलाइन क्लासेस पर रोक लगाने की भी मांग रखी गई।

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हाईकोर्ट में अपील की सलाह
याचिका को लेकर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हर राज्य की स्थिति अलग-अलग है। उन्होंने याचिकाकर्ता से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की सलाह दी।

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