धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

Anil Kumar | Publish: Jul, 17 2018 06:58:29 PM (IST) इंडिया की अन्‍य खबरें

सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी में रखने वाली आइपीसी की धारा 377 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित रख लिया है।

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी में रखने वाली आइपीसी की धारा 377 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित रख लिया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में पांच सदस्यों वाली संवैधानिक पीठ ने मंगलवार को सभी पक्षों से कहा है कि इस मामले में अपना-अपना लिखित हलफनामा दाखिल करें। बता दें कि संवैधानिक पीठ ने चार दिनों तक इस मामले की सुनवाई करते हुए मंगलवार को आखिरी बहस पूरी कर ली। मालूम हो कि आइपीसी की धारा 377 के तहत दोषी पाए जाने पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और दंड का प्रावधान है।

कब आएगा फैसला

आपको बता दें कि संवैधानिक पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। संवैधानिक पीठ में शामिल चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाइ चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की संविधान पीठ ने सभी पक्षों से 20 जुलाई तक अपने-अपने दावे के समर्थन में लिखित हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है। बता दें कि इस विवादास्पद मामले में देश की सर्वोच्च अदालत 2 अक्टूबर से पहले फैसला सुना सकती है। गौरतलब है कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं।

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2001 में पहली बार यह मामला आया था सामने

गौरतलब है कि 2001 में पहली बार धारा 377 को खत्म करने के मामले में सबसे पहले नाज फाउंडेशन ने मुद्दा उठाया था। फाउंडेशन ने याचिका दायर करते हुए कहा था कि इस धारा से मानवता के मूलभुत अधिकारों का हनन हो रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में 2009 में फैसला सुनाते हुए इस धारा को खत्म कर दिया था और समलैंगिकता को आपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था हालांकि 2013 में देश की सर्वोच्च अदालत ने फिर से मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया। इसके बाद एक बार फिर से इस मामले में रिव्यू पिटीशन दायर की गई जो कि अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके बाद अदालत में क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल की गई जो लंबित है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दायर नई याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। संवैधानिक पीठ ने पहले ही कह दिया है कि इस मामले में दायर क्यूरेटिव पिटीशन पर सुनवाई नहीं करेगी।

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