लोकपाल की नियुक्त पर केंद्र का रवैया ढुलमुल, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- दाखिल करें नया हलफनामा

लोकपाल की नियुक्ति को लेकर केंद्र के हलफनामे को कोर्ट 'अपर्याप्त' बताते हुए चार सप्ताह नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

नई दिल्ली: लोकपाल की खोज समिति के सदस्यों की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार की ओर दिए गए जवाब से सुप्रीम कोर्ट ने नाखुशी जाहिर की है। मंगलवार को कोर्ट ने केंद्र सरकार से लोकपाल की नियुक्ति के नए संभावित नामों का सुझाव देने के लिए एक खोज समिति गठित करने को कहा है।

चार हफ्ते में दाखिल करें नया हलफनामा

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति आर. भानुमती और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की अगुवाई वाली पीठ ने केंद्र द्वारा दाखिल हलफनामे को 'अपर्याप्त' बताते हुए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को चार सप्ताह में सभी विवरणों के साथ एक नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सभी आवश्यक कदमों के संबंध में 'सभी विवरण' सौंपने के लिए एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा।

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समीति में होंगे 50 प्रतिशत पिछड़े

सुनवाई के प्रारंभ में अटार्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने अदालत को बताया कि चयन समिति ने बैठक में खोज समिति गठित करने का फैसला किया और अगली बैठक में वे खोज समिति के लिए नाम सुझाएंगे। वेणुगोपाल ने कहा कि प्रक्रिया में समय लगेगा, क्योंकि खोज समिति में शामिल किए जाने वालों को कानून, वित्त, भ्रष्टाचार से लड़ने और अन्य क्षेत्रों में विशेषज्ञता होनी चाहिए। वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि खोज समिति के नामों को अंतिम रूप देने के बाद खुफिया ब्यूरो द्वारा उसकी समीक्षा की जाएगी और यह एक समय लेने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने अदालत से कहा कि खोज समिति के 50 प्रतिशत सदस्यों को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों से संबंधित होना होगा।

लेटलतीफी पर भड़के प्रशांत भूषण

अदालत में एनजीओ 'कॉमन कॉज' की तरफ से वकील प्रशांत भूषण पेश हुए। उन्होंने भ्रष्टाचार पर निगरानी के लिए लोकपाल की नियुक्ति करने के लिए विधायी जनादेश को पूरा करने में केंद्र द्वारा कदम पीछे खींचने का आरोप लगाया। भूषण ने अदालत को बताया कि पिछले साढ़े चार सालों में प्रतिष्ठित न्यायविद श्रेणी में चयन समिति के पास केवल वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी हैं। उन्होंने कहा कि अदालत के पास उपलब्ध विकल्प में या तो उन लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए, जो लोग लोकपाल की नियुक्ति को लटकाने के लिए जिम्मेदार हैं, या फिर संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अदालत अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए एक खोज समिति नियुक्ति करे और उसके सुझाए गए नामों में से एक लोकपाल नियुक्त करे।

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