अयोध्या विवादः सुप्रीम कोर्ट कल सुबह सुनाएगा ऐतिहासिक फैसला, देशभर में सुरक्षा कड़ी

  • उत्तर प्रदेश, कर्नाटक में स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे।
  • मुंबई, दिल्ली समेत तमाम शहरों में सुरक्षा बल तैनात।
  • सुप्रीम कोर्ट में चलने वाला दूसरा सबसे लंबा मुकदमा।

नई दिल्ली। अयोध्या विवाद को लेकर चल रहे ऐतिहासिक मुकदमे पर सुप्रीम कोर्ट कल यानी शनिवार 9 नवंबर को फैसला सुनाएगा। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अदालत में शनिवार सुबह 10.30 बजे इस मामले को सूचीबद्ध किया गया है। इससे पहले शुक्रवार को दिनभर सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस बड़े मामले का फैसला सुनाए जाने से पहले देशभर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और तमाम शहरों में सुरक्षा बलों ने फ्लैग मार्च किया।

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सुप्रीम कोर्ट में लिस्टिंग के अतिरिक्त रजिस्ट्रार ने शुक्रवार शाम को एक नोटिस जारी किया। नोटिस के मुताबिक चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अदालत में शनिवार सुबह 10.30 बजे अयोध्या मामले का फैसला सुनाया जाएगा।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ में न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर शामिल हैं। पांचों जस्टिस की यह बेंच शनिवार सुबह सबसे ऐतिहासिक फैसले की घोषणा करेगी।

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दूसरी सबसे लंबी सुनवाई

बता दें कि इससे पहले पिछले माह 16 अक्टूबर को 40 दिन तक चली मैराथन सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह दूसरा सबसे लंबी सुनवाई वाला मुकदमा है। इससे पहले केशवानंद भारती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिसाहिक रूप से 68 दिनों तक सुनवाई की थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले के संबंध में 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 अपील दायर की गई थीं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चार दीवानी मुकदमों में अयोध्या के 2.77 एकड़ विवादित भूमि को तीन पक्षों में बराबर बांटने का फैसला सुनाया था। इस मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला नाम के तीन पक्ष थे।

मध्यस्थता समिति फेल

चीफ जस्टिस द्वारा इस मामले को लेकर पहले जस्टिस एफएम खलीफुल्लाह, श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू को मिलाकर एक मध्यस्थता समिति का गठन किया गया था। लेकिन इस मामले में अदालत के बाहर मध्यस्थता असफल रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट में बीते 6 अगस्त से इस मामले की रोजाना सुनवाई चालू हुई।

क्या थी दलीलें

हिंदू पक्ष ने इस मामले को लेकर पूरे 2.77 एकड़ भूखंड पर अपना हक जताया था और इसे भगवान राम का जन्मस्थान बताया। जबकि मुस्लिम पक्षकार ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा था कि केवल यह मानने से कि यह भगवान राम का जन्मस्थान है, यह जमीन कानूनी रूप से उनकी नहीं हो जाती।

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मामले की सुनवाई के दौरान पक्षों ने अपने दावों का आधार इतिहासकारों, पर्यटकों, ब्रिटिश काल में जारी किए गए गजट और भूमि दस्तावेज को बनाया था। इसके अलावा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया था।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

केंद्र सरकार के अलावा उत्तर प्रदेश सरकार समेत अन्य प्रदेशों में भी इस फैसले के आने से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिल्ली पुलिस ने भी अपने कर्मचारियों की तैनाती के अलावा संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बढ़ाने का कदम उठाया है।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में पहले से ही प्रशासन सख्ती किए हुए है और धारा-144 लागू है। वहीं, उत्तर प्रदेश में सभी स्कूलों को 11 नवंबर तक बंद रखने का आदेश सुना दिया गया है। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में पुलिस और सुरक्षा बलों ने फ्लैग मार्च कर शांति बनाए रखने की अपील की। यह सूचना सामने आते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई और कानून व्यवस्था का जायजा लिया।

जबकि इस मामले से जुड़े पक्षकारों ने भी मीडिया से बातचीत में देशवासियों से कोई भी फैसला आने पर शांति बनाए रखने और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

भाजपा ने बुलाई बैठक

इस ऐतिहासिक मामले के फैसले को लेकर केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने भी एक बैठक बुलाई है। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह के मौके पर पंजाब जाएंगे।

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अमित कुमार बाजपेयी
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