क्या होती है Psychological Autopsy? पुलिस और जांच एजेंसियों को इसकी जरूरत कब पड़ती है?

HIGHLIGHTS

  • सुशांत सिंह राजपूत ( Sushant Singh Rajput Death Case ) के रहस्यमय मौत की जांच कर रही सीबीआई हर पहलू पर गौर करते हुए साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी ( Psychological Autopsy ) का सहारा लेगी।
  • साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी ( Psychological Autopsy ) को बोलचाल की भाषा में PA भी कहा जाता है। इसमें इस बात की व्याख्या करने की कोशिश की जाती है कि यदि किसी व्यक्ति ने आत्म हत्या करने का प्रयास किया है तो क्यों?

नई दिल्ली। 34 वर्षीय बॉलीवुड़ अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ( Sushant Singh Rajput Death Case ) के मौत का मामला अब और भी रहस्यमय होता जा रहा है। दो महीने से भी अधिक हो चुके इस घटना से पर्दा उठाने के लिए देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई ने अपनी तफ्तीश तेज कर दी है।

अब सुशांत सिंह के रहस्यमय मौत की जांच कर रही सीबीआई हर पहलू पर गौर करते हुए साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी ( Psychological Autopsy ) का सहारा लेगी। सीबीआई ने फैसला किया है कि वह इस मामले में साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी करेगी। तो ऐसे में अब ये सवाल महत्वपूर्ण है कि आखिर साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी क्या है, जिसके जांच के बाद सीबीआई को पूरे घटनाक्रम की जानकारी मालूम हो जाएगी।

क्या होती है साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी

साइकालॉजिकल ऑटोप्सी के बारे में जानने से पहले ये जान लेते हैं कि ऑटोप्सी क्या होता है? ऑटोप्सी यानी शवपरीक्षा (Autopsy या Postmortem Examination) एक विशिष्ट प्रकार की शल्य प्रक्रिया है। इसमें शव के आंतरिक व बाह्य अगों की पूरी जांच की जाती है, ताकि ये पता चल सके कि व्यक्ति की मौत किस कारण से हुई है या किस तरीके से हुई है। आक्समिक दुर्घटना या रोगग्रस्त या अप्राकृति मौत होने की अवस्था में शव का परीक्षण कराना अतिआवश्यक है।

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अब साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी किसी शव की ऑटोप्सी की तरह ही होता है। साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी ( Psychological Autopsy ) को बोलचाल की भाषा में PA भी कहा जाता है। इसमें इस बात की व्याख्या करने की कोशिश की जाती है कि यदि किसी व्यक्ति ने आत्म हत्या करने का प्रयास किया है तो क्यों? उसके क्या कारण हो सकते हैं?

इसकी जांच के लिए मरने वाले के मेडिकल रिकॉर्ड्स, उसके दोस्तों और परिवारों या उनसे संबंध रखने वालों से बातचीत की जाती है और फिर सभी के बयानों का बारीकी से शोध किया जाता है। शोध में मरने से पहले व्यक्ति की मानसिक स्थिति क्या थी, ये जानना सबसे मत्वपूर्ण लक्ष्य होता है।

पुलिस और जांच एजेंसियों को क्यों पड़ती है जरूरत?

बता दें कि किसी भी जांच एजेंसी और पुलिस के लिए किसी व्यक्ति के अप्राकृतिक मौत पर उनके शव का ऑटोप्सी कराना जरूरी होता है। यदि व्यक्ति की मौत रहस्यमय तरीके से हुआ हो और ऑटोप्सी से उनकी मौत के बारे में कोई ठोस कारण या वजह का पता नहीं चल पाता है तब साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी ( Psychological Autopsy ) के बारे में विचार किया जाता है।

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साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी से पुलिस या जांच ऐजेंसी को ये जानने में मदद मिलती है कि अप्राकृतिक मौत सुसाइड है या नहीं। यदि है तो इसमें ये जानने की कोशिश की जाती है कि उस दौरान मृतक की मानसिक स्थिति क्या थी? मौत से पहले मृतक का व्यवहार किस प्रकार का था? वह समान्य था या फिर किसी परेशानी से गुजर रहा था? सामान्य तौर पर वह दोस्तों या रिश्तेदारों या फिर अपने करीबियों से कितना मिलता जुलता था? उसके खाने पीने का समय बदला था या नही? इसके लिए मृतक की निजी सूचनाओं और जानकारियों मसलन मोबाइल के मैसेजेस, कॉल्स, डायरी, घर के सामानों की जांच, परिवार वालों और दोस्तों के मृतक के व्यवहार की जानकारी जैसी तमाम चीज़ों का अध्ययन किया जाता है।

बता दें कि इससे पहले सीबीआई ने सुनंदा पुष्कर मौत मामले और पिछले साल दिल्ली पुलिस ने बुराड़ी फांसी कांड को साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी का इस्तेमाल करते हुए सुलझाया था।

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Anil Kumar
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