ये हैं वो 5 जज जिन्होंने सुनाया ट्रिपल तलाक पर ऐतिहासिक फैसला

ट्रिपल तलाक पर फैसला सुनाने वाले पांचों जज अलग-अलग धर्म के हैं। 

नई दिल्ली। तीन तलाक पर आज सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला आया। सुप्रीम कोर्ट ने अगले 6 महीने तक ट्रिपल तलाक पर रोक लगा दी। साथ ही यह भी कहा कि केंद्र सरकार संसद में 6 महीने के अंदर ट्रिपल तलाक पर कानून बनाए। इस फैसले को सुनाने के लिए पांच जज शामिल थे। सबसे अहम बात यह है कि यह पांचों ही जज अलग-अलग धर्मों से हैं। इन पांच जजों में मुख्य न्यायधीश जेएस खेहर, जज कुरियन जोसेफ, जज रोहिंटन फली नरीमन, जज उदय उमेश ललित व जज अब्दुल नजीर हैं। आइए विस्तार से जानिए कि कौन हैं यह पांच जज जिन्होंने तीन तलाक पर अहम फैसला दिया है।

मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर
जस्टिस जेएस खेहर भारत के 44वें मुख्य न्यायधीश हैं। वह पहले सिख जज भी हैं। जस्टिस खेहर ने उस संवैधानिक बेंच की अगुवाई की थी जिसने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को नकार दिया था। जस्टिस खेहर ने इसके अलावा पांच जजों की उस संवैधानिक बेंच की अगुवाई भी कर चुके हैं, जिसमें अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को बहाल किया था। सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को जेल की सजा भी जस्टिस खेहर ने ही दी थी। आने वाली 28 अगस्त को जस्टिस खेहर रिटायर हो जाएंगे। उनकी जगह दीपक मिश्र भारत के नए मुख्य न्यायधीश होंगे।

जज कुरियन जोसेफ
जज जोसेफ कुरियन 5 जजों के ग्रुप के दूसरे जज हैं। जज कुरियन का मानना रहा है कि जब तक देश में एक आजाद न्यायपालिका है, तब तक देश को किसी भी प्रकार रूढि़वादिता से कोई भी खतरा नहीं है। जज कुरियन कोयला घोटाले की जांच कर रही बेंच में शामिल हैं। यही नहीं वह उस बेंच का नेतृत्व कर रहे हैं। हाल में सुप्रीम कोर्ट की ओर से आए अल्पसंख्यक संस्थानों से जुड़ी शैक्षिक संस्थाओं पर फैसला देने वाली बेंच का नेतृत्व जस्टिस कुरियन ने ही किया था। उस बेंच में यह कहा गया था कि अल्पसंख्यक संस्थानों के पास भी समुदाय से किसी योग्य व्यक्ति को प्रिंसिपल नियुक्त करने का अधिकार है। जज कुरियन मार्च 2013 में सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त हुए थे। बता दें कि अगले साल नवंबर में उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है।

जज अब्दुल नजीर
इस साल फरवरी में ही अब्दुल नजीर सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त हुए थे। जज अब्दुल नजीर इस फैसले की बेंच में अकेले मुस्लिम जज हैं। जज नजीर अयोध्या मामले में न्यायिक बेंच का हिस्सा भी हैं। वह राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के लिए बनाई गई बेंच का हिस्सा हैं। इसके अलावा जज नजीर निजता के अधिकार मामले पर सुनवाई गई बेंच का हिस्सा हैं।

जज उदय उमेश ललित
जज उमेश ललित को साल 2014 के जुलाई महीने में सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था। जस्टिस ललित का नाम जिला अदालतों, उच्च न्यायालयों और सभी शीर्ष कोर्ट में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के प्रति सपोर्ट के लिए जाना जाता है। इसके अलावा जज ललित दहेज उत्पीड़न से जुड़े केसेज में पुलिस पर तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाने वाली बेंच का हिस्सा रह चुके हैं। इसके अलावा वह सुप्रीम कोर्ट की उस बेंच में भी शामिल हैं, जिसने सीबीआई को मणिपुर में साल 2000 से 2012 तक इंडियन आर्मी पर लगी हत्याओं की जांच के आदेश दिए हैं। जस्टिस ललित नवंबर 2022 में रिटायर होंगे।

 

जज रोहिंटन फली नरीमन
जज रोहिंटन फली नरीमन देश के प्रतिष्ठित वकील फली सैम नरीमन के बेटे हैं। उन्हें तुलनात्मक धार्मिक अध्ययनों के लिए जाना जाता है। जज नरीमन को जुलाई 2014 में सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया था। जज नरीमन पारसी धर्म से हैं। इसके अलावा वह निजता के अधिकार पर अपना फैसला सुरक्षित रखने वाली बेंच का हिस्सा भी रह चुके हैं।

Ravi Gupta
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