त्रिपुरा: 994 सीटों पर पंचायत चुनाव शनिवार को, 85 फीसदी सीटों पर भाजपा ने पहले ही दर्ज की जीत

त्रिपुरा: 994 सीटों पर पंचायत चुनाव शनिवार को, 85 फीसदी सीटों पर भाजपा ने पहले ही दर्ज की जीत

  • 994 सीटों पर Tripura panchayat elections
  • 85 फीसदी सीटों पर भाजपा ने पहले ही हासिल की जीत
  • विपक्षी दलों ने अधिकांश सीटों पर उम्मीदवार नहीं उतारे

नई दिल्ली। त्रिपुरा में शनिवार को त्रि-स्तरीय ग्राम पंचायतों के चुनाव ( Tripura Panchayat elections ) होंगे। इस चुनाव में कुल 6,646 सीटों में से केवल 994 सीटों पर ही मतदान होगा। दरअसल, राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा ( BJP )ने पहले ही निर्विरोध 85 फीसदी सीटों पर जीत दर्ज कर ली है। त्रिपुरा राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) के एक अधिकारी ने इस बारे में जानकारी दी।

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अधिकारी के मुताबिक कि कुल 12 लाख 3,070 मतदाताओं में से आठ लाख 54,900 मतदाता 833 ग्राम पंचायतों के साथ ही 82 पंचायत समितियों और 79 जिला परिषद सीटों पर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। कुल मिलाकर आठ जिलों के अंतर्गत आने वाले 31 ब्लॉकों के 1,848 मतदान केंद्रों पर 2,327 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।

वहीं, मतदान का संचालन करने के लिए 9,500 से अधिक सरकारी कर्मचारियों और वरिष्ठ अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। वोटों की गिनती 31 जुलाई को होगी। त्रिपुरा के पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) अरिंदम नाथ ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान सुचारु और शांतिपूर्वक रुप से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

राज्य चुनाव आयोग अधिकारी ने कहा, 'माकपा (मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी) और कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने अधिकांश सीटों पर उम्मीदवार नहीं उतारे हैं। दोनों पार्टियों ने कई उम्मीदवारों के नामांकन भी वापस ले लिए हैं।'

चुनाव से पहले हिंसा

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स्थानीय निकायों ( Tripura panchayat elections ) के चुनाव को लेकर इस महीने की शुरुआत में कई झड़पे और चुनावी हिंसा हुई थी। जिसमें भाजपा, माकपा और कांग्रेस के कम से कम 75 नेता और कार्यकर्ता घायल हो गए थे। पुलिस के अनुसार, चुनाव पूर्व हिंसा और झड़पें मुख्य रूप से दक्षिण त्रिपुरा, पश्चिम त्रिपुरा, खोवाई और उत्तरी त्रिपुरा जिलों में हुईं थी।

इस वजह से विपक्षी पार्टियों ने नहीं किया नामांकन

वहीं, माकपा के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा और कांग्रेस ( Congress ) के नेताओं ने आरोप लगाया है कि भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से बड़े पैमाने पर डराए-धमकाए जाने के कारण पंचायत चुनाव के लिए कोई अनुकूल स्थिति नहीं है। इसलिए उनके उम्मीदवारों ने हजारों सीटों पर अपना नामांकन दाखिल ही नहीं किया है।

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विपक्ष ने लगाया आरोप

विपक्षी नेताओं ने पुलिस और राज्य चुनाव आयोग पर निष्क्रिय बने रहने का आरोप लगाया था। माकपा के राज्य सचिव और पार्टी केंद्रीय समिति के सदस्य गौतम दास ने कहा कि उन्होंने राज्य चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि कुछ रिटर्निग अधिकारी भी भाजपा के पक्ष में काम कर रहे हैं । उन्होंने वाम उम्मीदवारों के वैध नामांकन पत्र भी स्वीकार नहीं किए थे।

विपक्षी दलों ने राजनीतिक आधार खो दिए

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दूसरी ओर, आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा नेताओं ने दावा किया कि विपक्षी दलों ने अपने राजनीतिक आधार खो दिए हैं। उन्हें चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार के रूप में कोई भी नहीं मिल रहा है। पार्टी के प्रवक्ता नबेंदु भट्टाचार्जी ने कहा, 'माकपा और कांग्रेस दोनों अपनी पक्के तौर पर दिख रही हार के डर से पंचायत चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इसीलिए वे भाजपा के खिलाफ निराधार और फर्जी आरोप लगा रहे हैं।'

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