केरल में निपाह वायरस का कहर: 2 और लोगों की मौत, अलर्ट हुआ जारी

निपाह वायरस का आतंक बढ़ रहा है। कई लोगों की जान इस वायरस ने ले ली है।

कोच्चि। निपाह वायरस का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को केरल के कोझिकोड में निपाह वायरस से दो और लोगों की मौत की खबर है। आशंका जताई जा रही है कि दोनों लोग निपाह वायरस के संपर्क में आ गए थे। दोनों का आइसोलेशन वार्ड में उपचार चल रहा था। दोनों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। उधर निपाह बुखार से संक्रमित 8 लोगों को एक अलग वार्ड में निगरानी में रखा गया है। आपको बता दें कि इस बीमारी से अबतक एक दर्जन के करीब लोगों की मौत हो चुकी है। पीड़ित परिवार का इलाज कर रही नर्स ने भी तेज बुखार के कारण दम तोड़ दिया।

यह भी पढ़ें : राजनाथ सिंह की पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी: मिलेगा हर गोली का जवाब

 

यह भी पढ़ें : कर्नाटक चुनाव के बाद मोदी को एक और झटका, अब दिल्‍ली के आर्कबिशप चर्चों ने...

मरीजों के परिजनों को रखा दूर
कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सकों ने संक्रमित मरीज के परिवारवालों को अस्पताल आने पर रोक लगा दी है। क्योंकि निपाह वायरस का संक्रमण मरीज के संपर्क में आने से तेजी से फैलता है। कोझिकोड जिले मेें करीब 30 परिवार के घर छोड़ने की भी खबर है। वहीं करीब 150 लोग खुद गांव से बाहर चले गए हैं। निपाह वायरस से हुई मौतों के बाद अफरातफरी का माहौल है। हालांकि केरल की स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि डरने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।वहीं तमिलनाडु सरकार ने सीमावर्ती जिलों सहित दूसरी जगहों पर बुखार के पीड़ितों की निगरानी बढ़ा दी और स्थिति पर करीबी नजर बनाई हुई है। प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव जे राधाकृष्णन ने कहा कि घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।उधर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए डॉक्टरों की एक टीम को तैयार करने का निर्देश दिया, जिसे केरल रवाना कर दिया गया। स्वास्थ कर्मचारी वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए चमगादड़ों को पकड़कर मारने में भी लगे हुए हैं।

क्या है निपाह वायरस?
निपाह वायरस ( NiV ) एक तरह की संक्रमित रोग है, जो कि एक जानवर से फलों और फिर व्यक्तियों में फैलता है। ये तेजी से उभरता वायरस है जो इंसानों और जानवरों में तेजी से फैलता है। इससे व्यक्ति की मौत हो सकती है। चिंता की वजह यह है कि निपाह के इलाज के लिए अब तक किसी सटीक इलाज की खोज नहीं हो सकी है।निपाह बुखार के इलाज के लिए न तो कोई दवाई है और न ही इससे बचाव के लिए कोई टीका ईजाद किया गया है। वक्त रहते सही इलाज और लगातार निगरानी से ही जान बच सकती है। 1998 में मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में पहली बार इसके मामले सामने आए थे। इसलिए इसे निपाह वायरस नाम दिया गया।

Saif Ur Rehman
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned