केंद्रीय मंत्री का बयान, खास घराने के लोग ही बन पाते हैं जज

Kapil Tiwari

Publish: Dec, 07 2017 01:25:49 (IST)

Miscellenous India
केंद्रीय मंत्री का बयान, खास घराने के लोग ही बन पाते हैं जज

उपेंद्र कुशवाहा ने जजों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि पिछड़ों, दलितों और महिलाओं के लिए दरवाजे खुलने चाहिए।

नई दिल्ली: अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चाओं में रहने वाले मोदी सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने जजों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि देश की सर्वोच्च न्यायालय और सभी शीर्ष अदालतों में जजों की नियुक्ति योग्यता को देखकर नहीं की जाती है, बल्कि कुछ खास घरानों के लोगों को ही हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट मे जज बनाया जाता है। कुशवाहा का ये बयान उन युवाओं के लिए एक झटका है जो इन पदों पर पहुंचने के लिए जीतोड़ मेहनत करने में जुटे हुए हैं। आपको बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा बिहार की काराकाट लोकसभा सीट से सांसद और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के संस्थापक भी हैं।

सामान्य लोगों के लिए दरवाजे हैं बंद
उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बयान के जरिए सीधे तौर पर जजों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। उन्होंने अपने बयान में आगे कहा है कि मौजूदा व्यवस्था के तहत किसी भी सामान्य परिवार के व्यक्ति के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का जज बनना बहुत मुश्किल है, एक तरह से उनके लिए ये दरवाजे बंद हैं। बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने ये बातें कही। आगे उन्होंने कहा कि दलित वर्ग के लोग तो क्या अगर कोई सामान्य जाति का योग्य व्यक्ति भी हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में जज बनना चाहे तो वह नहीं बन सकता

होनी चाहिए न्यायिक सेवा की स्थापना
कुशवाहा ने बताया कि आजाद भारत के इतिहास में सिर्फ अभी तक 250-300 घराने ऐसे हैं जिनके लोग ही हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जज बनते रहे हैं और अब भी उन्हीं के परिवार के लोग जज बन रहे हैं। सामान्य लोगों के लिए दरवाजा बंद है। इस दरवाजे को खोलना होगा। कुशवाहा ने कहा कि आईएएस और आईपीएस की तरह ही अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की स्थापना की जानी चाहिए।

दलित-पिछड़ों और महिलाओं को भी मिलना चाहिए मौका
केंद्रीय राज्यमंत्री ने इस दौरान नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि इन पदों पर पहुंचने के लिए सामान्य लोगों को भी मौका मिलना चाहिए और उन लोगों के लिए भी जज बनने के दरवाजे खुलने चाहिए। इसके लिए उन्होंने अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के होने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस संबंध में संविधान में भी लिखा गया है लेकिन आज तक उस दिशा में कुछ हुआ नहीं है। कुशवाहा ने कहा कि संविधान में जितनी बातें लिखी गई हैं उनको जमीनी स्तर पर नहीं उतारा गया है और जब ऐसा नहीं होगा तब तक दलितों, पिछड़ों, ओबीसी और महिलाओं की स्थिति बेहतर नहीं बनाई जा सकती।

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