जाति के आधार पर पूजा-अनुष्ठान कराने से इनकार न करें उच्च जातियों के पुजारीः उत्तराखंड हाईकोर्ट

जाति के आधार पर पूजा-अनुष्ठान कराने से इनकार न करें उच्च जातियों के पुजारीः उत्तराखंड हाईकोर्ट

| Updated: 12 Jul 2018, 06:30:57 PM (IST) इंडिया की अन्‍य खबरें

'उच्च जातियों के पंडितों को निम्न जातियों के लोगों के यहां धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और अन्य पारंपरिक विधियों को संपन्न कराने से इनका नहीं करना चाहिए।'

नई दिल्ली। जातिवाद को लेकर देशव्यापी संघर्ष के बीच उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक अहम आदेश जारी किया है। इस आदेश के मुताबिक सवर्ण जातियों के पुजारी अनुसूचित जातियों-जनजातियों से जुड़े लोगों के यहां परंपरागत कार्यक्रम संपन्न कराने से इनकार नहीं कर सकते। यह अहम आदेश डिविजन बेंच के जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस लोकपाल सिंह ने दिया है। उन्होंने कहा, 'उच्च जातियों के पंडितों को निम्न जातियों के लोगों के यहां धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और अन्य पारंपरिक विधियों को संपन्न कराने से इनका नहीं करना चाहिए।'

'बिना भेदभाव मिलना चाहिए मंदिर में प्रवेश'

बेंच ने यह भी कहा, 'कोई भी व्यक्ति चाहे वह किसी भी जाति से संबंध रखता हो उसे बिना किसी भेदभाव मंदिर में प्रवेश करने की इजाजत मिलनी चाहिए। इसी तरह किसी भी जाति के व्यक्ति को मंदिर में पुजारी के तौर पर काम करने से नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उचित प्रशिक्षण के बाद कोई भी व्यक्ति मंदिर में पूजा करवा सकता है। कोर्ट ने ये अहम टिप्पणियां दो साल पहले दायर की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की।

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मंदिर की सीढ़ियों को लेकर भी था विवाद

प्राप्त जानकारी के मुताबिक याचिकाकर्ता हरिद्वार में हर की पौड़ी के पास एक धर्मशाला के संरक्षक हैं। उन्होंने यह भी मांग की थी कि संत रविदास मंदिर की तरफ जाने वाली सीढ़ियों को किसी दूसरी जगह लगा दिया जाए। हालांकि उच्च जाति के कुछ लोगों ने श्रद्धालुओं का रास्ता अवरूद्ध होने की बात कहकर इस मांग को खारिज कर दिया। हालांकि इस मामले में दखल देने से इनकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि सभी पक्ष आपस में मिलकर इस मामले को सुलझा लें।

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