अब वेंटिलेटर आपकी जेब में, कृत्रिम सांस के लिए अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं

Rahul Chauhan

Publish: Sep, 13 2017 10:43:00 PM (IST)

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अब वेंटिलेटर आपकी जेब में, कृत्रिम सांस के लिए अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं

पोर्टेबल वेंटिलेटर अपने मॉडल की वजह से आम आदमी के लिए सरल है। इसे चलाना भी आसान है। मरीज पोर्टेबल वेंटिलेटर को घर में भी इस्तेमाल कर सकता है।

नई दिल्ली: एम्स ने एक निजी कंपनी के साथ मिलकर दुनिया का सबसे छोटा व सस्ता स्वदेशी पोर्टेबल वेंटिलेटर तैयार किया है। मोबाइल एप से चलने वाला यह वेंटिलेटर इतना छोटा है कि जेब में भी आसानी से रखा जा सकता है। मंगलवार को इसे एम्स में लांच किया गया। इसकी खास बात यह है कि ऑक्सीजन सिलेंडर के बगैर काम करने वाला यह दुनिया का पहला वेंटिलेटर है। एम्स में चल रहे किफायती मेडिकल तकनीक सम्मेलन के दूसरे दिन इसे प्रदर्शित किया गया। इसके पेटेंट के लिए भी आवेदन कर दिया गया है। इसकी कीमत सिर्फ 15,000 से 20,000 रुपए होगी।

युवा वैज्ञानिक दिवाकर ने किया तैयार
इस स्वदेशी पोर्टेबल वेंटिलेटर को ए सेट रोबॉटिक्स के हेड और युवा साइंटिस्ट दिवाकर वैश्य ने अपने दम पर तैयार किया है। दिवाकर इससे पहले माइंड कंट्रोल करने वाली वील चेयर, थ्री डी प्रिंटेड रोबॉट और डांसिंग रोबॉट बना चुके हैं।

चलाना आसान
पोर्टेबल वेंटिलेटर अपने मॉडल की वजह से आम आदमी के लिए सरल है। इसे चलाना भी आसान है। मरीज पोर्टेबल वेंटिलेटर को घर में भी इस्तेमाल कर सकता है। सामान्य वेंटिलेटर व्यक्ति की ऊंचाई के बराबर होता है। उसमें कई उपकरण होते हैं। उसे ट्रेंड डॉक्टर ही चला पाते हैं।

दिवाकर ने बताया कि वेंटिलेटर के जरिए संकट के समय मेसेज भी भेजा जा सकता है। इसमें ऑन-बोर्ड लाइट लगी है जो संभावित समस्या की जानकारी देती है। यह जानकारी वेंटिलेटर निर्माताओं को भी दी जा सकती है। करीबियों को चेतावनी देने के लिए इसमें कई तरह की टोन लगाई गई हैं। इसके बोर्ड पर दो कंप्यूटर हैं। एक खराब हो जाए तो दूसरा काम करने लगता है।

ऐसे करेगा काम
जिन मरीजों को सांस लेने में मुश्किल होती है, उनके गले में एक स्थाई ट्यूब डाली जाती है। इसी ट्यूब को पोर्टेबल वेंटिलेटर से जोड़ दिया जाता है। यह बिजली से चलता है। वेंटिलेटर में लगे प्रेशर सेंसर से मरीज जरूरत के मुताबिक सांस लेता और छोड़ता है।

ये हैं फायदे
छोटा और सस्ता
ट्रेनिंग की जरूरत नहीं
अस्पताल में रहने की जरूरत नहीं
कृत्रिम सांस देने के लिए मुफीद

क्यों है फायदेमंद
आम वेंटिलेटर की कीमत ढाई लाख से पांच लाख रुपए है। इस वजह से मरीज खुद वेंटिलेटर नहीं खरीद पाते। इसलिए उन मरीजों को अस्पताल में ही वेंटिलेटर पर रखना मजबूरी है, जबकि उनका इलाज पूरा हो चुका होता है। उन्हें सिर्फ सांस लेने के लिए वेंटिलेटर की जरूरत होती है। जबकि इस पोर्टेबल वेंटिलेटर की कीमत सिर्फ 15,000 से 20,000 रुपए ही है।

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