आलोचनाओं का उपराष्ट्रपति ने दिया जवाब, काफी मंथन के बाद खारिज किया महाभियोग

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि एक महीने से ज्यादा समय तक गहराई से सोच-विचार किया गया, इसके बाद वो इसे खारिज करने के नतीजे पर पहुंचे थे

नई दिल्ली। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को हाल ही में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने खारिज कर दिया था, जिसके बाद से ही उन्हें विपक्ष की तरफ से आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था। कांग्रेस पार्टी ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू पर कई सवाल खड़े किए थे। इस बीच अपने उपर उठ रहे सवालों और आलोचनाओं का उपराष्ट्रपति ने जवाब दिया है।

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने खारिज किया चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव

उपराष्ट्रपति ने आलोचनाओं का दिया जवाब
राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू ने विपक्ष के आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा है कि महाभियोग को खारिज करने का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया गया है, बल्कि इस मामले में एक महीने से ज्यादा समय तक गहराई से सोच-विचार किया गया, इसके बाद वो इसे खारिज करने के नतीजे पर पहुंचे थे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि राज्यसभा सभापति का कार्यालय कोई पोस्ट ऑफिस नहीं है बल्कि उसकी संवैधानिक हैसियत है।

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संवैधानिक प्रावधानों के तहत महाभियोग किया है खारिज- उपराष्ट्रपति
दरअसल, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के 10 वकीलों का एक समूह महाभियोग खारिज होने के बाद उपराष्ट्रपति से मिलने के लिए गया था। वकीलों के इस समूह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, ''मैंने अपना काम कर दिया है और मैं उससे संतुष्ट हूं। इसके लिए उन्हें बधाई देने की जरूरत नहीं है क्योंकि उन्होंने वही किया जिसकी उनसे उम्मीद थी।’ उन्होंने कहा कि महाभियोग प्रस्ताव को संवैधानिक प्रावधानों और जजेज इनक्वायरी एक्ट, 1968 के आधार पर खारिज किया गया है। जजेज इनक्वायरी एक्ट की धारा 3 में स्पष्ट कहा गया है कि महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार करने या खारिज करने से पहले राज्यसभा के सभापति को प्रथम दृष्टया उस पर विचार करना चाहिए।

पहले भी खारिज हो चुका है महाभियोग प्रस्ताव
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भले ही महाभियोग प्रस्ताव पेश करने के तीन दिन के अंदर उसे खारिज किया गया, लेकिन मीडिया में पिछले एक महीने से इसकी चर्चा थी और इसके मद्देनजर वो इसको लेकर काफी पहले से तैयारी कर रहे थे। इसलिए यह कहना गलत होगा कि फैसला जल्दबाजी में लिया गया है। वैसे महाभियोग प्रस्ताव खारिज होने का ये कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के जज जेसी शाह के खिलाफ ऐसे ही एक प्रस्ताव को तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष जीएस ढिल्लन ने खारिज कर दिया था। शाह बाद में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बने।

Kapil Tiwari
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