अर्थशास्त्री बने कवि, ट्विटर पर किया कवितापाठ

नरेंद्र मोदी सरकार नौकरी देने में सक्षम है कि नहीं इस पर दो अर्थशास्त्रियों ने ट्विटर पर अनोखी बहस छेड़ी

 

भारत के सूचना प्रौद्योगिकी पेशेवरों द्वारा प्रमुख तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले एच1बी वीजा को अमरीका और विस्तार नहीं देने संबंधी नियम बनाने पर विचार कर रहा है। इस खबर के आने के बाद अर्थशास्त्री बिबेक देबराय और सदानंद धूमे के बीच नरेंद्र मोदी सरकार के नौकरी देने के वादे को लेकर बहस ट्विटर पर छिड़ गई। बिबेक देबराय मोदी सरकार की आर्थिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष हैं वहीं सदानंद धूमे अर्थशास्त्री व स्तंभकार हैं। इस मुद्दे पर दोनों को ट्विटर पर राइमिंग गेम खेलते देखा गया। इस गेम के साथ उन्होंने भारत में नौकरी सृजन और अमेरिका में प्रस्तावित नियमों पर विचार विमर्श किया।

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when two economists turned poets debating job creation

शुरुआत बिबेक देबराय ने अमरीका के एच 1 बी वीजा नीति समीक्षा पर टिप्पणी से की। देबराय ने ट्विटर पर लिखा, अगर एच -1 बी नियमों को मरोड़ा गया, कुछ भविष्य इसकी वजह से उजड़ जाएंगे, जो ग्रीन कार्ड के इंतजार में है। उन्होंने कहा कि यह कदम राष्ट्रपति ट्रम्प के बाय अमरीका, हायर अमरीका का हिस्सा है। इस कदम से अमरीका में काम कर रहे लाखों भारतीय पेशेवर प्रभावित होंगे।
बिबेक देबराय के पोस्ट का जवाब देते हुए सदानंद धूमे ने कहा, "एच -1 बी जांच के बारे में अब सिसकियां लेने से क्या फायदा। मेरे मन में एक सवाल है जिसे जानना चाहता हूं कि मोदी सरकार ने देश में ही नौकरी की संभावना क्यों नहीं बनाई।

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धूमे का कहना था कि नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में हर साल 2 करोड़ नौकरी निर्माण का वादा किया था। जिसे पूरा किया होता तो विदेश जाने की नौबत नहीं आती। दोनों के बीच इसी तरह बातचीत कविता के रूप में देर तक चलती रही जिसका मजा ट्विटर यूजर लेते रहें।

Ekktta Sinha
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