विज्ञान का चमत्कार: 2 साल पहले कैंसर ने छीन लिया था इकलौता बेटा, फिर भी दादी बनने का मिला सुख

Kapil Tiwari

Publish: Feb, 15 2018 04:10:33 PM (IST) | Updated: Feb, 15 2018 04:13:50 PM (IST)

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विज्ञान का चमत्कार: 2 साल पहले कैंसर ने छीन लिया था इकलौता बेटा, फिर भी दादी बनने का मिला सुख

सेरोगेसी के जरिए राजश्री पाटिल ने अपने बेटे की आखिरी इच्छा को पूरा किया।

पुणे: विज्ञान ने समय-समय पर कई ऐसे चमत्कार किए हैं, जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। ऐसा ही एक चमत्कार महाराष्ट्र के पुणे में हुआ है, जहां एक युवक की मौत कैंसर की वजह से 2 साल पहले हो गई थी। लेकिन उसकी मौत के बाद भी अब उसका वंश आगे बढ़ गया है। दरअसल, कैंसर से मरने वाले युवक का वीर्य उस समय स्टोर किया गया था और उसके बाद किराए की कोख यानि कि सेरोगेसी के जरिए 2 बच्चों का जन्म हुआ। अब उस युवक का परिवार और खासकर की उस युवक की मां बेहद खुश है, क्योंकि परिजनों ने बताया है कि वो उसकी आखिरी इच्छा थी। परिवार डॉक्टरों का भी शुक्रिया अदा कर रहा है।

मौत से पहले बेटे का वीर्य किया था स्टोर
दरअसल, पुणे की रहने वालीं राजश्री पाटिल (48) ने 2 साल पहले अपने बेटे प्रथमेश पाटिल को ब्रेन कैंसर की वजह से खो दिया था। 27 साल की उम्र में प्रथमेश की मौत हो गई थी। प्रथमेश पाटिल अपने घर में इकलौते थे, इस वजह से मां के साथ उनका लगाव ज्यादा था। घर में कोई और बेटा न होने की वजह से प्रथमेश की ये आखिरी इच्छा थी कि किसी भी तरह उसका वंश न रूके और वो बढ़ता रहे। राजश्री पाटिल ने साइंस की मदद से अपने बेटे की आखिरी इच्छा को पूरा कर दिया है।

सेरोगेसी की मदद से बढ़ा वंश आगे
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, राजश्री पाटिल ने बेटे की मौत से पहले उसका वीर्य स्टोर करा लिया था। प्रथमेश की मौत के बाद डॉक्टरों की मदद से सेरोगेसी के जरिए उसी सीमेन से जुड़वां बच्चे एक लड़का और एक लड़की उन्हें मिले हैं। इन बच्चों को उन्हीं की एक रिश्तेदार ने जन्म दिया है। पाटिल को इन बच्चों में अपना बेटा प्रथमेश दिखाई देता है। राजश्री पाटिल ने बच्चों को भगवान का उपहार बताया है और लड़के का नाम प्रथमेश रखा है। उन्होंने लड़की का नाम प्रीषा रखा है।

डॉक्टरों ने इलाज के दौरान ही वीर्य किया था स्टोर
अपनी खुशी का इजहार करते हुए राजश्री पाटिल कहती हैं, "मुझे अपने बेटे से बेहद लगाव था, वो पढ़ाई में बहुत तेज था, वह जर्मनी के इंजीनियरिंग कॉलेज में मास्टर डिग्री की पढ़ाई करने के लिए गया हुआ था। जहां वो डॉक्टर से अपने ब्रेन कैंसर का इलाज करा रहा था। डॉक्टर ने प्रथमेश को कीमोथेरेपी के इलाज से पहले उसे अपने सीमेन को संरक्षित करने के लिए कहा था।"

एक रिश्तेदार ने बच्चों को दिया जन्म
प्रथमेश की मां कहती हैं कि उन्हें जरा सा भी एहसास नहीं था कि मेरा बेटा वापिस नहीं आएगा। राजश्री ने बताया कि पहले तो वो ही बेटे के वीर्य से खुद प्रेग्नेंट होने की सोच रही थीं, पीरियड्स बंद होने की वजह से मैं प्रेग्नेंट नहीं हो सकती थी। इसलिए हमने अपनी एक रिश्तेदार से मदद मांगी। एक शादी-शुदा रिश्तेदार को मैंने सेरोगेट मां बनने के लिए कहा और उन्होंने मुझे तोहफे में दो जुड़वा बच्चे दिए।

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