नौ बार नोबेल की रेस में शामिल रहे भारतवंशी पद्म विभूषण वैज्ञानिक ECG का अमरीका में निधन

करीब पांच दशक के अपने करियर में उन्होंने क्वांटम ऑप्टिक्स, क्वांटम जीनो इफेक्ट और क्वांटम कंप्यूटेशन से संबंधित कई सिद्धांत दिए।

ह्यूस्टन। नौ बार नोबेल के लिए नामित होने वाले पद्मविभूषण भौतिक विज्ञानी ईसी जॉर्ज सुदर्शन का 86 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने अमरीका में अंतिम सांस ली। गुरुवार को टेक्सास में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। सुदर्शन के परिवार में उनकी पत्नी भामथी सुदर्शन और दो बच्चे हैं। उनका जन्म 1931 में केरल में हुआ था।

...ऐसा रहा महान वैज्ञानिक का करियर

सुदर्शन ने 40 सालों तक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में बतौर प्रोफेसर अपनी सेवाएं दीं। करीब पांच दशक के अपने करियर में उन्होंने क्वांटम ऑप्टिक्स, क्वांटम जीनो इफेक्ट और क्वांटम कंप्यूटेशन से संबंधित कई सिद्धांत दिए। विज्ञान के साथ-साथ दर्शन और धर्म में भी उनका योगदान स्मरणीय है। वे ह्यूस्टन स्थित श्री मीनाक्षी मंदिर के ऑनररी एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य भी रहे थे।

नौ बार नामित फिर भी नहीं मिला नोबेल

इस महान भारतवंशी वैज्ञानिक को 2007 में भारत सरकार ने देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें नौ बार नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया था, हालांकि वे एक बार भी विजेता नहीं बन पाए।
- सीवी रमन पुरस्कार (1970)
- बोस पदक (1977)
- थर्ड वर्ल्ड अकादमी ऑफ साइंसेज अवॉर्ड (1985)
- मायोराना पदक (2006)
- आईसीटीपी का दिराक पदक (2010)
- केरल शस्त्र पुरस्कार (2013)

ECG Sudarshan

केरल में जन्मे थे सुदर्शन

सुदर्शन का जन्म केरल के कोट्टायम जिले के पल्लम गांव में 1931 में हुआ था। उन्होंने कोट्टायम के सीएमएल कॉलेज से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इसके बाद वे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल साइंसेज चले गए, जहां प्रख्यात वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा के साथ फंडामेंटल रिसर्च में काम किया।

Patrika Desk
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