कश्मीर मामले पर फिर से अमरीका का बड़ा बयान, कहा- नजरंबद नेताओं को दें ढील

कश्मीर मामले पर फिर से अमरीका का बड़ा बयान, कहा- नजरंबद नेताओं को दें ढील
morgan ortagus (File Photo)

Anil Kumar | Updated: 07 Sep 2019, 03:57:20 PM (IST) विश्‍व की अन्‍य खबरें

  • अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोर्गन ओर्टागस ने कश्मीर में प्रतिबंधों पर ढील देने का आग्रह किया है
  • कश्मीर में लगे प्रतिबंधों को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 16 सितंबर को सुनवाई करेगी anil.m

वाशिंगटन। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद पाकिस्तान में काफी बौखलाहट है। साथ ही कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जो कदम उठाए गए हैं उसे लेकर घरेलू स्तर से लेकर पाकिस्तान में भी आवाज बुलंद की जा रही है।

सरकार ने एहतियातन जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में धारा 144 लागू किया है और कई अन्य प्रतिबंध लगाए हैं। जिसको लेकर देश की सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की गई है। हालांकि अब अमरीका की ओर से एक बड़ा बयान सामने आया है।

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अमरीकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि कश्मीर में सरकार की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों में कुछ ढील दी जाए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोर्गन ओर्टागस ने कश्मीर में प्रतिबंधों पर ढील देने का आग्रह किया है।

उन्होंने आग्रह किया है कि कश्मीरी राजनेताओं की नजरबंदी और कश्मीर में प्रतिबंधों में ढील दी जाए। मोर्गन ने घाटी के किछ हिस्सों में मोबाइल और इंटरनेट सेवा बंद किए जाने व नेताओं की नजरबंदी पर चिंता व्यक्त की है। मोर्गन ओर्टागस ने कहा कि हम आग्रह करते हैं कि कश्मीर मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है याचिका

बता दें कि भारत सरकार ने बीते 5 अगस्त को एक एतिहासिक फैसला लेते हुए जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया था। कोई अनहोनी न हो इसके लिए सरकार ने एहतियातन भारी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया है।

इसे लेकर कुछ नेताओं व कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट 16 सितंबर को जम्मू-कश्मीर में आवाजाही की छूट सहित विभिन्न याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई करेगा।

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कश्मीर टाइम्स की संपादक अनुराधा भसीन के वकील ने कोर्ट से कहा कि घाटी में स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति पर प्रतिबंध लगाया गया है, मीडिया को बीते एक महीने से कार्य करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

हालांकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि श्रीनगर से अखबार प्रकाशित किए जा रहे हैं।

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