Azerbaijan के राष्ट्रपति का दावा, अराकेज नदी पर बने पुल को तीन दशक बाद छुड़ाया

Highlights

  • राष्ट्रपति ने ट्वीट कर बताया कि आर्मीनिया के कब्जे से छुड़ाए 13 गांव।
  • ये पुल 1990 के दशक से आर्मीनिया के कब्जे में था।

बाकू। अजरबैजान और आर्मीनिया के बीच अभी भी तनाव जारी है। इस युद्ध को लेकर पूरा विश्व आशंकित है। बताया जा रहा है कि युद्ध में आतंकी संगठन भी कूद पड़े हैं। उधर अजरबैजान के राष्ट्रपति (Azerbaijan President Ilham Aliyev) इल्हाम अलीयेव का दावा है कि उनकी सेना ने दक्षिणी जेबरैल जिले के 13 और गांवों पर दोबारा कब्जा जमा लिया है।

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सोमवार को राष्ट्रपति इल्हाम अलीवेय ने एक ट्वीट में सभी जिले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जेबरैल जिले के सोलतानी, अमीरवर्ली, हसनाली, अलीकेशानली, कुमलक, हासिली, गोयारसिनवेसल्ली, नियाजकुल्लर, केसाल मम्मदली, साहवली, हासी इस्माइली और इसाकली गांव आजाद करा लिए गए हैं।

राष्ट्रपति ने 18 अक्टूबर को ट्वीट कर बताया कि अजरबैजान की सेना ने अराकेज नदी पर बने पुल पर अपना झंडा लहरा दिया है। ये 1990 के दशक से आर्मीनिया के कब्जे में था।

दोबारा अपने प्रस्ताव को दोहराया

कई लोगों ने एक वीडियो को शेयर किया है, जिसमें पुल के पास दर्जनों अजरबैजानी सैनिकों जमावड़ा देखा गया। अजरबैजान में युद्ध में बंदी बनाए गए या लापता लोगों के आयोग ने एक बार दोबारा अपने प्रस्ताव को दोहराया है। इसमें उसने आर्मीनिया के मृत सैनिकों के शवों एक खास कॉरिडोर के रास्ते वापस करने की बात कही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस आयोग के अधिकारियों ने रेड क्रॉस के अफसरों से मुलाकात कर उनसे आधिकारिक तौर पर आर्मीनियो को इस प्रस्ताव की सूचना देने के लिए कहा है।

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युद्ध विराम की घोषणा हुई थी

गौरतलब है कि शनिवार रात और रविवार के बीच दोनों पक्षों ने युद्ध विराम की घोषणा हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों ओर के युद्ध बंदियों और शवों की अदला-बदली करना था। हालांकि दोनों पक्षों की तरफ से कहा जा रहा है कि युद्ध विराम वास्तव में शुरू नहीं हुआ है।

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Mohit Saxena
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