अंटार्कटिका ग्लेशियर से बह रही हैं खून की धाराएं, विज्ञान जगत में मचा हड़कंप

अंटार्कटिका ग्लेशियर से बह रही हैं खून की धाराएं, विज्ञान जगत में मचा हड़कंप

| Updated: 12 Feb 2018, 02:38:48 PM (IST) विश्‍व की अन्‍य खबरें

ये वॉटरफॉल मैक-मरडो की घाटी में स्थित है।

नई दिल्ली। वॉटर फॉल देखना किसे नहीं पसंद। पहाड़ के ऊपर से गिरते पानी के झरने वाकई में काफी सुंदर लगते हैं लेकिन अगर एक पल के लिए ही सही इन्हें देखकर आपको अजीब लगे या फिर अपनी आंखों पर ही विश्वास न हो पाएं तो? ऐसा सुनकर आपक ो यहीं लग रहा होगा कि भला झरना कब से लोगों को अजीब लगने लगा और क्यों? तो आपको बता दें कि एक ऐसा झरना भी है जो कि वाकई में अजीब है जिसे देखने पर एक पल के लिए लगेगा कि वो पानी का नहीं बल्कि खून का झरना है।

Taylor Waterfall

हम बात कर रहें है यहां अंटार्कटिका टॉयलेर ग्लेशियर के एक वाटरफॉल के बारे में जिससे बहने वाले पानी का रंग खून के जैसा गाढ़ा लाल होता है। इस वाटरफॉल का नाम इसी कारण से ब्लड फॉल पड़ गया।

ये वॉटरफॉल मैक-मरडो की घाटी में स्थित है। साल 1911 में अमरीकी जीव वैज्ञानिक ग्रिफिथ टॉयलर ने इस ग्लेशियर का खोज किया था जिस वजह से उन्हीं के नाम से ये फेमस हो गया।

ये वॉटरफॉल एक पांच मंजि़ले मकान के समान ऊंचा है। इतना अनोखा होने के बावजूद इस वाटरफॉल को देखने के लिए लोगों में कोई उत्सुकता नहीं है, क्योंकि उनका ऐसा मानना है कि यहां बुरी आत्माओं का निवास है, जो लोगों को मार देती है और इसी वजह से इस वॉटरफॉल का रंग लाल है।हांलाकि विज्ञान का कुछ और ही कहना है।

Taylor Waterfall

वैज्ञानिक ये कहते हैं कि ग्लेशियर के नीचे बहने वाली झील भी जमकर ग्लेशियर में तब्दील हो गई है और ग्लेशियर में दरार पडऩे से पानी धीरे-धीरे बहता रहता है और पानी में मौजूद आयरन ऑक्साइड हवा के संपर्क में आने के कारण लाल रंग का हो जाता है, जिससे पानी का रंग खून जैसा दिखता है। इस ग्लेशियर के पानी में करीब सत्रह प्रकार के सूक्ष्म जीव पाए जाते हैं।

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