जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणाम झेलने वाले देशों में पांचवें स्थान पर भारत, ये देश हैं पहले नंबर पर

  • भारत में बीते वर्ष लू के थपेड़ों और 100 साल की सबसे भीषण बाढ़
  • जलवायु परिवर्तन और गर्म हवाओं में गहरा संबंध

मैड्रिड। दुनियाभर इस वक्त जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणामों से गुजर रहा है। ऐसे में चाहे गरीब देश हो या अमीर, इस दुष्प्रभाव हर किसी पर पड़ रहा है। हर देश जलवायु परिवर्तन के कारण आनेवाली आपादा के साए में है। इसमें जहां जापान, फिलीपींस, जर्मनी ऐसे देशों में शामिल रहे बीते साल प्रतिकूल मौसम के कारण सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। इसके ठीक पीछे भारत और मैडागास्कर देश का नाम है।

पर्यावरण थिंकटैंक जर्मनवॉच की रिपोर्ट में दावा

ये जानकारी पर्यावरण थिंकटैंक जर्मनवॉच की ओर से बुधवार को जारी रिपोर्ट में मिल रही है। इस रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण देशों को बाढ़, गर्मी और विनाशकारी तूफान जैसी आपदाओं का सामना करना पड़ा है। थिंकटैंक की रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले साल जापान में जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, दो बार गर्मी और 25 सालों का सबसे विनाशकारी तूफान का आया। इसके कारण पूरे देश में सैकड़ों लोगों की मौत भी हुई थी।

हर देश में आ रही हैं मुसीबतें

यही नहीं, सितंबर महीने में उत्तरी फिलीपींस में काफी शक्तिशाली मैंगहट तूफान आया था। अद्यतन वैश्विक जलवायु खतरा सूचकांक के मुताबिक यह तूफान श्रेणी-5 का तूफान था। इसके चलते करीब ढाई लाख लोग विस्थापित हुए। साथ ही, तूफान के चलते कई जानलेवा भूस्खलन की घटनाएं हुई। वहीं, जर्मनी दीर्घकालिक गर्मी की तपिश और सूखे से जूझ रहा है। इसकी चपेट में आने से चार महीने में 1,250 लोगों की असमय मृत्यु हुई।

भारत में 100 की सबसे भीषण बाढ़

वहीं, भारत में बीते वर्ष लू के थपेड़ों और 100 साल की सबसे भीषण बाढ़ और दो भयंकर तूफान का सामना किया। इसके चक्कर में कुल 38 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। जर्मनवॉच के शोधकर्ता लौरा स्किफर ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, 'विज्ञान ने साबित किया है कि जलवायु परिवर्तन और गर्म हवाओं में गहरा संबंध है।' उन्होंने कहा, 'यूरोप में बीते सौ साल के मुकाबले गर्म हवाओं के चलने की आशंका 100 गुना तक बढ़ गई है।' रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते 20 वर्ष में सबसे गरीब क्षेत्रों पर भी मौसम की विकराल मार पड़ी है। प्यूर्तो रिको, म्यांमार और हैती ऐसे देश हैं जो सबसे अधिक उष्ण कटिबंधीय तूफानों की वजह से प्रभावित हुए हैं।

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Shweta Singh
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