CORONA TREATMENT : स्वीडन में क्यों विकसित नहीं हुई हर्ड इम्युनिटी

कोरोनावायरस को लेकर दुनिया के लगभग सभी देशों में लॉकडाउन किया गया लेकिन स्वीडन में लॉकडाउन नहीं किया गया। यहां सार्वजनिक स्थलों पर भी उतनी सख्ती नहीं थी। स्वीडन ने इसे हर्ड इम्युनिटी विकसित करने का फार्मूला बताया था। लेकिन हाल ही जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रेल के अंत तक यहां सिर्फ 7.3 प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडी विकसित हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि हर्ड इम्युनिटी के लिए 18-24 महीने लगते हैं, इस लक्ष्य को पाना आसान नहीं है।

स्टॉकहोम. स्वीडन के पब्लिक हैल्थ अथॉरिटी के अनुसार हर्ड इम्युनिटी यानी 70-90 प्रतिशत लोगों में वायरस के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी के विकसित होने को कहते हैं। 1118 लोगों पर एक सप्ताह में परीक्षण किया गया। देश के अन्य हिस्सों में परीक्षण की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। स्वीडन के महामारी विशेषज्ञ एंडर्स टेगनेल ने कहा कि लोगों में अपेक्षानुरूप कम एंटीबॉडी विकसित हुआ।

रेस्तरां, बार, स्टोर सब खुले हैं
देश में सख्त लॉकडाउन नियमों को लागू नहीं किया। महामारी से बचने के लिए स्वीडन ने उत्तरी यूरोप के देशों से अलग रणनीति अपनाई। अधिकांश स्कूल, रेस्तरां, सैलून और बार, स्थानीय पर्यटन को बंद नहीं किया। हालांकि, इसे जनता की व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर छोड़ दिया था। स्वीडन में अब तक 32,172 संक्रमित और 3,871 मौतें हो चुकी हैं। हालांकि विदेश मंत्री पीटर लिंडग्रेन कहा कि हालांकि हम कोरोना से होने वाली मौतों को रोकने में विफल रहे।

क्यों चुना अलग रास्ता
लॉकडाउन को लागू न करने के फैसले का स्वीडिश शोधकर्ताओं ने शुरू में आलोचना की थी, लेकिन सरकार का कहना था कि अभी तक दुनिया में इसकी कोई वैक्सीन व दवा विकसित नहीं है। कोरोना का जब तक कोई कारगर इलाज नहीं मिल जाता तब तक यही विकल्प है।

हर्ड इम्युनिटी में 18-24 माह लगते
मिनेसोटा विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर इंफेक्शियस डिजीज रिसर्च एंड पॉलिसी के निदेशक माइकल ऑस्टरहोम का अनुमान है कि अमरीका में 5 से 15 प्रतिशत लोग संक्रमित हैं। हर्ड इम्युनिटी के लिए कम से कम 60 से 70 प्रतिशत आबादी का संक्रमित होना जरूरी है। इसके लिए 18 से 24 महीने लगते हैं जिसे पाना आसान नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के हैल्थ इमर्जेंसी प्रोग्राम के कार्यकारी निदेशक डॉ. माइक रेयान ने कहा कि किसी देश के लिए हर्ड इम्युनिटी का लक्ष्य पाना आसान नहीं है। यह खतरनाक अवधारणा है।

Ramesh Singh
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