Coronavirus: जल्द आने वाली है एंटीवायरल दवाइयां, अगले साल तक वैक्सीन

HIGHLIGHTS:

  • दुनिया के 80 से अधिक देशों में फैला कोरोना वायरस ( Coronavirus )
  • वायरस से बचाव के लिए चिकित्सक वैक्सीन ( Vaccine ) बनाने पर कार्य कर रहे हैं
  • अगले कुछ महीनों में एंटीवायरल दवाएं ( Antiviral medicines ) उपलब्ध हो जाएंगी

वाशिंगटन। रहस्यमय जानलेवा कोरोना वायरस ( coronavirus ) से दुनिया में लगातार मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है और इसी के साथ लोगों में खौफ भी बढ़ रहा है। अब तक 80 से अधिक देशों में ये वायरस फैल चुका है। लिहाजा अब इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए दुनियाभर में कोशिशें जारी है।

इस बीच दुनिया के बड़े-बड़े चिकित्सक कोरोना वायरस से उपचार के लिए वैक्सीन ( Vaccine ) की तलाश में दिनरात शोध में जुटे हुए हैं। इसको लेकर कई देशों ने दावे भी किए कि कोरोना के उपचार के लिए दवा मिल गई है, लेकिन अभी तक सही मायने में आधिकारिक तौर पर ये वैक्सीन या दवा को माना नहीं गया है। अब नई दवा या वैक्सीन कब आएगी इसको लेकर संशय बरकरार है।

इसको लेकर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ( US President Donald Trump ) ने कहा है कि दुनियाभर के चिकित्सक कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन बनाने की कोशिश में हैं, लेकिन ज्यादा समय लगने का मतलब हतोत्साहित करने वाला होगा और हम इसका भुगतान हीं कर सकते हैं।

हालांकि दवा उद्योग का कहना है कि जल्द ही इसके लिए नए दवा बाजार में आएंगे। इस हफ्ते अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस की बैठक दुनियाभर के दवा कंपनियों के अधिकारियों ने कहा कि वे इसपर काम कर रहे हैं। कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एंटीवायरल दवाएं ( Antiviral medicines ) कुछ महीनों में उपलब्ध हो सकेगी, लेकिन इसका टीका ( vaccine ) यानी वैक्सीन अगले साल तक ही उपलब्ध हो पाएगा। इसपर ट्रंप ने कहा- पूरा कर लो, हमें इसकी आवश्यकता है।

दो दशक में कई घातक वायरस का प्रहार

आपको बता दें कि बीते दो दशक में कई घातक वायरस ने दुनियाभर में देखने को मिले हैं। इसकी वजह से हजारों लोगों की जान भी गई। हालांकि काभी मशक्कत और शोध के बाद इस तरह के वायरस के खतरे से निपटने के लिए वैक्सीन तैयार की गई।

इससे पहले इबोला नाम के वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लिया था। ये वायरस जानवरों से मनुष्यों में फैला था। यह वायरस इतना खतरनाक था कि संक्रमितों में से आधे से अधिक को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इसका अलावा जीका वायरस ने शिशुओं को अपनी चपेट में लिया। इस वायरस ने बच्चों के जन्म होने से पहले ही उसे काफी नुकसान पहुंचाया।

इस तरह के वायरस से निपटने के लिए दवा कंपनियों ने अरबों रुपये खर्च किए। अब कोरोना से लड़ने के लिए प्रयास जारी है और दुनिया भर के वैज्ञानिक तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। चीन में शोधकर्ताओं ने जल्दी से अपना आनुवंशिक अनुक्रम प्रदान किया है, जिससे अन्य वैज्ञानिकों को उपचार और टीकों के विकास के लिए तेजी से शुरुआत मिली है।

चीन में अबतक हर तरह के करीब 200 से अधिक परीक्षण किए जा चुके हैं, जिसमें HIV और फ्लू के लिए विकसित दवाएं भी शामिल हैं। आपको बता दें कि दुनिया भर में वायरस से 1 लाख के करीब लोग संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 3,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

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Anil Kumar
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