कोर्ट का आदेश: परवरिश के बदले मां को देने होंगे 6 करोड़ रुपए

बेटे ने कहा कि अनुबंध को अमान्य माना जाना चाहिए क्योंकि परवरिश के बदले पैसे की मांग करना गलत है।

माता-पिता ने शायद ही कभी अपने बच्चों पर उनकी देखभाल करने में विफल रहने पर मुकदमा किया हो। लेकिन ताइवान की अदालत में ऐसा ही एक मुकदमा दर्ज किया गया। चूंकि ताइवान के नागरिक संहिता के मुताबिक अपने बुजुर्ग माता-पिता की सही तरीके से देखभाल करने की जिम्मेदारी उनके प्रौढ़ संतानों की है। ऐसे में यह पूरी कार्यवाही ताइवान कोर्ट के लिए असामान्य थी। अब पूरी कहानी सुनने के बाद कोर्ट ने बेटे को उस राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है जिसे मां ने उसके ऊपर खर्च किया था। कोर्ट का कहना है कि बेटे की परवरिश और उसकी शिक्षा में अब तक जितनी रकम मां ने खर्च की हैं उस सब का हिसाब उन्हें मिलेगा।
बेटे का नाम चू है, वह पेशे से दंत चिकित्सक है और इस मुकदमे के बाद उसे अपनी मां को करीब 6.4 करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा। वहीं मां एक तलाकशुदा महिला हैं, जो कभी दंत चिकित्सक थीं। अपनी पहचान छुपाने के लिए मां ने कोर्ट की कारवाही में केवल अपना उपनाम लू दर्ज करवाया था।
दोनों बेटों के साथ किया था कॉन्ट्रैक्ट
लू ने 1977 में अपने बेटे के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। उस समय बेटे की उम्र 20 वर्ष थी। इस कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक अपने दंत चिकित्सा का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद जब वह नौकरी करेगा तब उसे अपनी मासिक आय का 60 प्रतिशत मां को देना होगा। इसी तरह का कॉन्ट्रैक्ट उन्होंने अपने बड़े बेटे के साथ भी किया था। कॉन्ट्रैक्ट में लिखा गया था कि उनके दोनों बेटों को स्कूल की फीस के भुगतान के रूप में कमाई का कुछ हिस्सा देना होगा, जो लगभग 11 करोड़ रुपए था।
बड़े बेटे ने मां के साथ समझौता कर कुछ रकम उन्हें लौटा दी थीं लेकिन चू ने पूरी तरह से इस कॉन्ट्रैक्ट को नकार दिया था। चू का कहना है कि जब कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था तब उसकी उम्र काफी कम थी। चू ने कहा कि अनुबंध को अमान्य इसलिए भी माना जाना चाहिए क्योंकि परवरिश के बदले पैसे की मांग करना गलत है। हालांकि, ताइवान के कोर्ट ने मां के पक्ष में फैसला सुनाया और उसे ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के प्रवक्ता के मुताबिक न्यायाधीशों के नजर में कॉन्ट्रैक्ट वैध था क्योंकि जब बेटे उस पर हस्ताक्षर किए थे उस समय वह बालिग था और उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर भी नहीं किया गया था।

Ekktta Sinha
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