पाकिस्तान के ईशनिंदा कानून पर EU ने जताई चिंता, स्पेशल स्टेटस खत्म करने का प्रस्ताव संसद में पेश

यूरोपीय संसद ने अपने नवीनतम सत्र में पाकिस्तान के ईशनिंदा कानून पर चिंता जताते हुए प्रस्ताव पेश किया है जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान में कट्टरपंथी बेहद हावी हैं। वहां अल्पसंख्यकों के खिलाफ मनमाने ढंग से ईशनिंदा कानून का इस्तेमाल हो रहा है।

इस्लामाबाद। धार्मिक कट्टरता के लिए पूरी दुनिया में बदनाम हो चुके पाकिस्तान ने कठोर ईशनिंदा कानून बनाया है, जिसको लेकर यूरोपीय संघ (EU) ने चिंता जताई है। पाकिस्तान के कठोर ईशनिंदा कानून पर चिंता जताते हुए EU ने कहा कि यह कानून विरोधियों और उनके रक्षकों को चुप कराने और धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करने के लिए अक्सर दुरुपयोग किया जाता है और यह अहमदी मुसलमानों के लिए सबसे अधिक बड़ा खतरा है।

यूरोपीय संसद ने अपने नवीनतम सत्र में पाकिस्तान के ईशनिंदा कानून पर चिंता जताते हुए धार्मिक स्वतंत्रता के लिए जगह देने की मांग की और एक प्रस्ताव रखा। साथ ही यूरोपीय संघ के अधिकारियों से आग्रह किया कि जीएसपी (विशेष व्यापारिक दर्जा) तुरंत प्रभाव से खत्म किया जाए। प्रस्ताव में कहा गया है कि पाकिस्तान में कट्टरपंथी बेहद हावी हैं। वहां अल्पसंख्यकों के खिलाफ मनमाने ढंग से ईशनिंदा कानून का इस्तेमाल हो रहा है।

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ईयू के इस टिप्पणी और संसद में पेश किए गए प्रस्ताव को लेकर पाकिस्तान आगबबूला हो गया। पाकिस्तान ने एक बड़ा फैसला लेते हुए शुक्रवार को यूरोपीय संसद के एक कदम को रोक दिया, जिसने एक दिन पहले इस्लामाबाद को धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए स्वतंत्रता की अनुमति देने के प्रस्ताव को अपनाया था और यूरोपीय संघ को दक्षिण एशियाई देश की तरजीही व्यापार स्थिति पर पुनर्विचार करने के लिए कहा था।

पाकिस्तान ने EU के फैसले पर जताई नाराजगी

आपको बता दें कि पाकिस्तान सरकार ने यूरोपीय संघ के फैसले पर नाराजगी जताई। विदेश कार्यालय ने पाकिस्तान पर यूरोपीय संसद के प्रस्ताव पर निराशा व्यक्त की और एक बयान में कहा है कि यूरोपीय निकाय में पाकिस्तान के ईश निंदा कानूनों की प्रासंगिक समझ का अभाव है।

विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ज़ाहिद हफीज चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान की न्यायिक प्रणाली और घरेलू कानूनों के बारे में क्षेत्रीय ब्लॉक के कानूनन निकाय द्वारा "अनुचित टिप्पणी" बहुत निराशा की बात थी। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान एक "एक जीवंत समाज, स्वतंत्र मीडिया और स्वतंत्र न्यायपालिका के साथ संसदीय लोकतंत्र है"।

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जाहिद हाफ़िज़ चौधरी ने कहा। "पाकिस्तान बिना भेदभाव के अपने सभी नागरिकों के लिए मानवाधिकारों के संवर्धन और संरक्षण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है"। "हम अपने अल्पसंख्यकों पर गर्व करते हैं, जो संविधान में निहित अधिकारों के समान अधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता के पूर्ण प्रक्षेपण का आनंद लेते हैं"।

विदेश कार्यालय ने आगे कहा, किसी भी मानव अधिकारों का उल्लंघन और किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा में मदद करने के लिए देश में न्यायिक और प्रशासनिक तंत्र हैं। पाकिस्तान ने धर्म की स्वतंत्रता या विश्वास, सहिष्णुता और अंतर-विश्वास सद्भाव को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाई। बढ़ते इस्लामोफोबिया और लोकलुभावनवाद के समय, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को ज़ेनोफ़ोबिया, असहिष्णुता से लड़ने के लिए एक आम संकल्प का प्रदर्शन करना चाहिए और धर्म या विश्वास के आधार पर हिंसा के लिए उकसाना और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

Anil Kumar
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