GREAT INDIAN : इनकी रिसर्च से जलवायु परिवर्तन व मानसून से जुड़े अनुमानों की सटीकता बढ़ेगी

भारत व अमरीका के बीच नई तकनीक विकसित करने के लिए फुलब्राइट कलाम फैलोशिप दी जाती है। मन्ना सुब्बा को इस फैलोशिप के लिए चुना गया है जो पैन्सिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में एरोसोल (सूक्ष्म ठोस कणों अथवा बूंदों के हवा में मिलने को एरोसोल कहते हैं), जलवायु परिवर्तन व मानसून की सटीक भविष्यवाणी को लेकर काम कर रही हैं।

सुब्बा मूलत: दार्जिलिंग के कलिम्पोंग की रहने वाली हैं। बचपन में जब वह छोटी थीं तो उन्होंने जंगल में आग लगी देखी। तो वह सोचती थी कि इससे पेड़ों और इससे बढऩे वाली गर्मी से वातावरण को क्या नुकसान होता है। वर्ष 2013 में इसरो जियोस्फेयर बायोस्फेयर प्रोग्राम के तहत एरोसोल रेडिएटिव फोर्सिंग ओवर इंडिया (एआरएफआई) प्रोजेक्ट से जूनियर रिसर्च फेलो के रूप में जुड़ीं। इस प्रोजेक्ट के तहत उन्होंने बादलों व बरसात को समझने के लिए मॉडल सिमुलेशन और वैश्विक वायु गुणवत्ता पर शोध किया है। पैन्सिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में इनके प्रोजेक्ट का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी रणनीति बनाना है। इनके प्रोजेक्ट से देश में मानसून परिवर्तन व जलवायु के बदलावों के बारे में समझने में ज्यादा आसानी होगी।
49 प्रतिशत महिलाओं को अच्छी नौकरी नहीं
हाल ही हुए एक ऑनलाइन सर्वे में पाया गया कि लैंगिक असमानता की वजह से महिलाओं को अच्छी नौकरी के अवसर पुरुषों की अपेक्षा कम मिलते हैं। इसमें 49% महिलाओं ने कहा कि उन्हें पुरुषों के बराबर नौकरी के अवसर नहीं मिले। 65% महिलाओं ने कहा कि कंपनियों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व न के बराबर है। यह सर्वे देश के 20 आइआइएम की 400 पूर्व व वर्तमान छात्राओं से किया गया।

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Ramesh Singh Desk
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