आर्कटिक में राजस्थान व मध्यप्रदेश जितनी पिघलेगी बर्फ !

- आर्कटिक सागर का तापमान अन्य ग्रहों की अपेक्षा तीन गुना तेजी से बढ़ रहा है।

वर्ष 2021 में देश के दो बड़े राज्यों राजस्थान और मध्यप्रदेश के क्षेत्रफल से अधिक बर्फ आर्कटिक में पिघल जाएगी।

नई दिल्ली। आर्कटिक सागर में तेजी से बर्फ पिघल रही है। अमरीकी नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) के आकलन के आधार पर अनुमान लगाए तो वर्ष 2021 में देश के दो बड़े राज्यों राजस्थान और मध्यप्रदेश के क्षेत्रफल से अधिक बर्फ आर्कटिक में पिघल जाएगी। लगातार तापमान बढऩे से आर्कटिक में बर्फ भी कम जम रही है। इससे बाढ़ का खतरा बढ़ेगा। गर्मियों में पिघलने वाली बर्फ की रिकवरी हर साल मार्च माह तक हो जाती है। इससे बर्फ के जमने-पिघलने का संतुलन बना रहता है। लेकिन आर्कटिक में ऐसा नहीं है। यहां बर्फ अधिक पिघल रही है। इसकी वजह है, आर्कटिक सागर का तापमान अन्य ग्रहों की अपेक्षा तीन गुना तेजी से बढ़ रहा है।

8.8 लाख वर्ग किमी पिघलेगी-
नासा की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में आर्कटिक में 8.8 लाख वर्ग किलोमीटर बर्फ पिघल जाएगी। यह भारत के दोनों बड़े राज्यों, मध्यप्रदेश व राजस्थान के क्षेत्रफल 6.5 लाख वर्ग किमी से अधिक है। गौरतलब है कि आर्कटिक का क्षेत्र 140 लाख वर्ग किमी है। इतनी बड़ी तादाद में बर्फ का पिघलना आर्कटिक की सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जा सकता। 

अस्तित्व पर मंडराया खतरा-
सैटेलाइट डेटा के अनुसार 2020 से मार्च 21 तक पिछले 43 सालों में आर्कटिक में सबसे कम बर्फ जमी है। आर्कटिक महासागर में ग्रीनलैंड और कनाडाई आर्कटिक द्वीपसमूह के बीच 40 किमी चौड़े और 600 किमी लंबे क्षेत्र में पहले से जमी पुरानी बर्फ की परत कमजोर हो रही है। इससे आर्कटिक के अस्तित्व पर खतरा हो सकता है।

लगातार पिघल रही बर्फ-
ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स के वैज्ञानिकों के अध्ययन के अनुसार 1994 से 2017 के बीच 23 साल में 28 ट्रिलियन टन बर्फ पिघल चुकी है। इसमें सबसे ज्यादा 7.6 ट्रिलियन टन बर्फ आर्कटिक से पिघली है।

विकास गुप्ता
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