इमरान ने अमरीका को दिखाई आंख, आतंकवाद के खिलाफ जंग में नहीं देगा उसका साथ

इमरान ने अमरीका को दिखाई आंख, आतंकवाद के खिलाफ जंग में नहीं देगा उसका साथ

इमरान ने कहा कि वह शुरू से ही जंग के खिलाफ रहे हैं और उनकी सरकार की विदेश नीति देश के सर्वोच्च हित में होती है

इस्लामाबाद। सत्ता बदलने के बाद पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि पाकिस्तान खुलकर अमरीका विरोध कर रहा है। इस बार उसने आतंकवाद के खिलाफ जंग में अमरीका का साथ न देने का मन बनाया है। गुरुवार को इमरान खान ने कहा कि वह भविष्य में किसी और देश की जंग नहीं लड़ेंगे। इमरान ने कहा कि वह शुरू से ही जंग के खिलाफ रहे हैं और उनकी सरकार की विदेश नीति देश के सर्वोच्च हित में होती है। रक्षा दिवस के कार्यक्रम पर बोलते हुए इमरान खान ने यह बात कही। इस मौके पर पाकिस्तान के कई सांसद,खिलाड़ी और तमाम कलाकार मौजूद थे। इमरान के बयान का अर्थ इस बात से लगाया जा रहा है कि वह अपनी धरती पर पल रहे आतंकवाद के खिलाफ जंग में पीछे हट सकता है।

दूसरे देश की जंग में हिस्स नहीं लेंगे

गौरतलब है कि अमेरिका और भारत की ओर से लगातार पाकिस्तान पर यह दबाव बनाया जाता रहा है कि वह अपनी धरती पर सक्रिय आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करे। आतंकवाद से जंग में गई जान को लेकर इमरान खान ने कहा कि वह बहुत पहले से इस जंग के खिलाफ रहा हैं। भविष्य में वह किसी भी दूसरे देश की जंग का हिस्सा नहीं बनेंगे। उनकी विदेश नीति देश के सर्वोच्च हित में होगी।

मदीना के मुस्लिम राज्य की तर्ज पर करेंगे विकास

इमरान खान ने कहा कि वह ह्यूमन कैपिटल पर निवेश करने का काम करेंगे। नए पीएम ने कहा कि बच्चों को स्कूल भेजने,अस्पताल तैयार करने और मेरिट सिस्टम बनाकर सभी के साथ एक समान व्यवहार सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि यह मदीना के पहले मुस्लिम राज्य की तर्ज पर किया जाएगा। सेना और सरकार के बीच मतभेदों के सवालों पर इमरान ने कहा कि देश के हितों को लेकर सभी एक ही राह पर हैं।

1965 और 1971 की जंग से बहुत कुछ सीखा

सेना के कामकाज की सराहना करते हुए इमरान ने कहा कि यह एकमात्र ऐसा संस्थान है,जिसमें कोई राजनीतिक दखल नहीं है और सब कुछ मेरिट के आधार पर होता है। इसी कार्यक्रम में पाक सेना चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने कहा कि पाक ने 1965 और 1971 की जंग से बहुत कुछ सीखा है और अपनी रक्षा के लिए परमाणु हथियारों को विकसित किया है।

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