अमरीका-चीन दक्षिण चीन सागर में हुए आमने-सामने, बढ़ा तनाव

अमरीका-चीन दक्षिण चीन सागर में हुए आमने-सामने, बढ़ा तनाव

सितंबर में गश्‍त के दौरान जब दोनों देशों के युद्धपोत आमने-सामने आए तो अमरीकी युद्धपोत डेकाटर की ओर से चीनी युद्धपोत को चेतावनी दी गई।

अमरीका और चीन के बीच पिछले कुछ समय से तनाव देखने को मिल रहा है। दक्षिण चीन सागर पर दोनों देश एक बार फिर आमने-सामने हैं। दरअसल, 30 सितंबर को दक्षिण चीन सागर में अमरीका के युद्धपोत ने चीन युद्धपोत को चेतानवी भी दी थी। इसके बाद दोनों में टकराव होते-होते बचा था। इसी संबंध में चीन और अमरीका के बीच उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें चीन ने अमरीका को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि वे चीन के द्वीपों के पास अपने पोत और सैन्य विमान भेजना बंद करे। बता दें, चीन इन द्वीपों को अपना बताता रहा है।

इस बैठक को अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच इसी महीने के अंत में होने वाली बातचीत की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार- सितंबर माह में दक्षिण चीन सागर पर अमरीका और चीन के युद्धपोत गश्‍त कर रहे थे। इसी दौरान जब दोनों देशों के युद्धपोत आमने-सामने आए तो अमरीकी युद्धपोत डेकाटर की ओर से चीन युद्धपोत को चेतावनी दी गई। डेकाटर से तेज हॉर्न बजाया गया लेकिन चीनी नौसेना ने इसे नजरअंदाज किया।

युद्धपोतों के टकराने की आशंका के मद्देनजर सुरक्षा इंतजाम भी अपनाए गए। अमरीकी नौसैनिकों ने आरोप लगाया कि उन्‍हें जबरन रास्‍ते से अलग करने की कोशिश की गई। खबरों के अनुसार- दोनों देशों के युद्धपोत करीब 45 यार्ड की दूरी तक पास आ चुके थे।

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इसी को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों तथा सैन्य प्रमुखों के बीच बैठक हुई। चीन के ऐतराज जताने के बावजूद अमरीका ने अपना रुख स्पष्ट किया कि जहां कहीं भी अंतरराष्ट्रीय कानून आज्ञा देंगे वह विमान भेजना, पोत भेजना और उन स्थानों तक अपनी पहुंच जारी रखेगा।

बैठक में गहरे मतभेद के बावजूद दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने की जरूरत पर बल दिया गया। विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने अमेरिका-चीन कूटनीति एवं सुरक्षा बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि ‘अमरीका चीन के साथ शीत युद्ध रोकथाम की नीति नहीं अपना रहा है, बल्कि हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि दोनों देशों की सुरक्षा और समृद्धि के लिए चीन जिम्मेदाराना और निष्पक्ष रवैया अपनाए।'

गौरतलब है कि यह बैठक पिछले माह बीजिंग में होनी थी, लेकिन ताइवान को नए हथियारों की बिक्री की घोषणा होने व अन्य कारणों से स्थगित कर दी गई थी।

पोम्पिओ के चीनी समकक्ष यांग जाइची के अनुसार- ‘चीनी पक्ष ने अमरीका से स्पष्ट कर दिया है कि उसे चीन के द्वीपों और रीफ के निकट अपने पोत और सैन्य विमान भेजने बंद करने चाहिएं और ऐसी कार्रवाइयां बंद करनी चाहिएं जो चीनी प्राधिकार और सुरक्षा हितों को कमजोर करते हों।’

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