NEW STUDY : 2500 साल पहले भेड़-बकरी नहीं, गाय-भैंस का होता था पालन

वैज्ञानिक रूप से पहली बार साबित हुआ है कि सिंधु घाटी सभ्यता (INDUS VALLEY) के दौरान 2500 ईसा पूर्व में डेयरी उत्पादन कार्य होता था। कनाडाई व भारतीय शोधकर्ताओं के संयुक्त अध्ययन में यह बात सामने आयी है।

जर्नल नेचर में प्रकाशित स्टडी के अनुसार गुजरात स्थित कोटड़ा भादली के पुरातात्विक स्थल पर पाए जाने वाले मिट्टी के बर्तनों के अवशेषों का आणविक रासायनिक विश्लेषण के बाद यह दावा किया है।
59 नमूनों में से 22 में डेयरी साक्ष्य
गुजरात स्थित कोटड़ा भादली के पुरातात्विक स्थल से मिले अवशेषों के रासायनिक विश्लेषण के दौरान 59 नमूनों में से 22 में डेयरी लिपिड की उपस्थिति पायी गई। स्टेबल आइसोटोप एनालिसिस प्रक्रिया (STABLE ISOTOPE ANALYSIS PROCESS ) के माध्यम से शोधकर्ता डेयरी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पशुओं की भी पहचान कर ली।

दूध का उत्पादन घरेलू खपत से ज्यादा

शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि भेड़-बकरी नहीं गाय-भैंस जैसे पशु थे। अध्ययन का नेतृत्व कर रहे मिसिसॉगा विश्वविद्यालय के पोस्टडॉक्टोरल रिसर्चर कल्याण शेखर चक्रवर्ती के अनुसार डेयरी उत्पादन की उपलब्धता के चलते ये पुरानी सभ्यता समृद्ध रही होगी। इसके जरिये ही पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन मिलता रहा होगा। संभव है कि दूध का उत्पादन घरेलू खपत से ज्यादा रहा होगा।

ये शोधकर्ता रहे शामिल
अध्ययन में एक और भारतीय प्रोफेसर डेक्कन कॉलेज पोस्ट ग्रेजुएट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के भारतीय प्रोफेसर प्रबोध सिरवालकर व अन्य प्रोफेसर हीथर मिलर, हैमिल्टन की मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ जियोग्राफी एंड अर्थ साइंसेज से संबद्ध प्रोफेसर ग्रेग स्लाटर शामिल रहे।

Ramesh Singh
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