खालिस्तान लिबरेशन फोर्स में शीर्ष पद के लिए कलह शुरू, PAK, Italy, Britain के भी हैं दावेदार

HIGHLIGHTS

  • प्रतिबंधित आतंकवादी समूह ( Banned terrorist group ) खालिस्तान लिबरेशन फोर्स ( KLF ) के प्रमुख हरमीत सिंह ( Harmeet Singh ) की 2020 के जनवरी में लाहौर ( थोपदीा ) में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
  • KLF चीफ के लिए पाकिस्तान ( Pakistan ), ब्रिटेन ( Britain ) और इटली ( Italy ) में सक्रिय इस समूह का नेतृत्व भी दावेदारों में शामिल है।
  • KLF का अपना अलगाववादी खालिस्तानी एजेंडा है और इसके अस्तित्व का मुख्य आधार मादक पदार्थों की तस्करी है।

नई दिल्ली। खालिस्तान ( Khalistani ) की मांग को लेकर शुरू हुआ खालिस्तान लिबरेशन फोर्स ( Khalistani Liberation Force ) में अब शीर्ष पद के लिए अंदरूनी कलह शरू हो गया है। इस पद के लिए पाकिस्तान ( Pakistan ), ब्रिटेन ( Britain ) और इटली ( Italy ) में सक्रिय इस समूह का नेतृत्व भी दावेदारों में शामिल है।

दरअसल, अपने नेता हरमीत सिंह उर्फ हैप्पी पीएचडी ( Harmeet Singh Happy PhD ) की संदिग्ध मौत के बाद 4 महीने से अधिक समय से प्रतिबंधित आतंकवादी समूह खालिस्तान लिबरेशन फोर्स ( KLF ) के भीतर एक लंबी लड़ाई चल रही है। हरमीत सिंह की 2020 के जनवरी में लाहौर में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी।

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KLF के नेतृत्व में पाकिस्तान, ब्रिटेन, इटली और स्विट्जरलैंड के कट्टरपंथी तत्व सक्रिय हैं। पाकिस्तान स्थित लखबीर सिंह रोडे जो कि इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन (ISYF) के प्रमुख भी हैं, यूके से परमजीत सिंह पंजवार, गुरशरणवीर सिंह वाहिवाला, केएलएफ के प्रवक्ता धन्ना सिंह, इटली के गुरजिंदर सिंह शास्त्री और स्विटजरलैंड के पप्पू सिंह लगातार KLF के शीर्ष पद का चार्ज लेने के लिए कोशिश कर रहे हैं।

2018 से KLF भारत में प्रतिबंधित

आपको बता दें कि KLF का अपना अलगाववादी खालिस्तानी एजेंडा है और इसके अस्तित्व का मुख्य आधार मादक पदार्थों की तस्करी है। विशेष रूप से भारत के पंजाब में काफी सक्रिय है। पाकिस्तान के कुख्यात इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस ( ISI ) ने कई बार भारत में अवैध हथियारों और ड्रग्स की तस्करी के लिए आतंकवादी समूह का उपयोग किया है और अभी भी कर रहा है।

यही कारण है कि गृह मंत्रालय ( MHA ) ने गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम ( UAPA ) के तहत 2018 में KLF पर प्रतिबंध लगा दिया था। ISI लखबीर सिंह रोडे और परमजीत सिंह पंजवार को हमेशा से समर्थन दे रहा है। अब दोनों KLF प्रमुख बनने के लिए इटली, जर्मनी, कनाडा और यूके स्थित कैडर से समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी जानकारी है कि वाहीवाला और शास्त्री को ISI का समर्थन नहीं है, ऐसे में उनके लिए मुश्किलें बढ़ सकती है।

हैप्पी की हत्या में KLF प्रवक्ता धन्ना का हाथ!

कुछ मीडिया रिपोर्ट में ये बताया जा रहा है कि KLF अब एक नए गुट के साथ आगे की ओर बढ़ रहा है, जिसका नेतृत्व ब्रिटेन के गुरुशरणवीर सिंह वालावाला कर रहे हैं। वाहीवाला को कनाडा, अमरीका और इटली के कैडरों का समर्थन मिल रहा है। वाहिवाला का आरोप है कि KLF के प्रवक्ता धन्ना सिंह हैप्पी पीएचडी की हत्या के लिए जिम्मेदार हैं।

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सबसे बड़ी और दिलचस्प बात यह है कि धन्ना हैप्पी पीएचडी की हत्या से कुछ दिन पहले जनवरी के दूसरे सप्ताह में पाकिस्तान में था। इसके बाद 12 फरवरी, 2020 को कैडर को एक पत्र भेजा गया, जिसमें उन्होंने हैप्पी पीएचडी को 'स्वयंभू नेता' बताया। उनके और अन्य KLF नेताओं पर कटाक्ष करते हुए, उन्होंने पत्र में लिखा कि देवेंद्रपाल सिंह भुल्लर, दया सिंह लाहौरिया, लाल सिंह और हरनेक सिंह भप जैसे दिग्गज नेताओं द्वारा दी गई सलाह की अनदेखी की गई। उन्होंने पूर्व केएलएफ प्रमुख हरमिंदर सिंह मिंटू को 'भारतीय एजेंसियों के शैतान और एजेंट' के रूप में भी बुलाया और कहा कि मिंटू और हैप्पी पीएचडी दोनों को 'जत्थेदार का सम्मान नहीं मिला'। इस बीच, गुरशरणवीर सिंह के घर पर ब्रिटेन की मिड वेस्टलैंड पुलिस ने 19 फरवरी को धन्ना सिंह द्वारा तीखा हमला करने की शिकायत पर छापा मारा था।

हैप्पी पीएचडी की मौत के बाद समूह के भविष्य के पाठ्यक्रम पर चर्चा करने के लिए यूके स्थित केएलएफ कैडर 23 फरवरी को इकट्ठे हुए थे। इसमें कुल 8 लोग शामिल हुए थे, जिसमें गुरशरणवीर सिंह, अमृतवीर सिंह, अवतार सिंह खांडान अमनवीर सिंह भी मौजूद थे। गुरुशरणवीर ने पूर्व केएलएफ प्रमुखों हैप्पी पीएचडी, मिंटू के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों का हवाला देते हुए खुद के समर्थन के लिए प्रमाण देने की कोशिश की। साथ ही इटालियन और स्विस दावेदारों से बचने के लिए कहा और हिंसक गतिविधियों को जारी रखने का आह्वान किया।

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Anil Kumar
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