जर्मनी: शरणार्थी बच्चे ने क्लासमेट का किया रेप, कम उम्र के कारण नहीं चला सका मुकदमा

जर्मनी: शरणार्थी बच्चे ने क्लासमेट का किया रेप, कम उम्र के कारण नहीं चला सका मुकदमा

रेप करने वाले बच्चे की उम्र 10 साल है।

बर्लिन। जर्मनी में एक अफगान शरणार्थी बच्चे द्वारा 2 सीरियाई लड़कों की मदद से अपने क्लासमेट से रेप करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। रेप के बाद बच्चे को पकड़ लिया गया लेकिन उम्र कम होने के चलते प्रशासन ने उस पर मुकदमा चलाने से इनकार कर दिया है। मीडिया की खबरों में मामले के उछलने पर जर्मनी में इस घटना को लेकर काफी आक्रोश है। लोग शरणार्थियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। रेप करने वाले बच्चे की उम्र 10 साल है।

क्या है मामला

बर्लिन में स्थित एक स्कूल के तरफ से बच्चों को एक एडवेंचर ट्रिप पर ले जाया गया था। वहां अफगान बच्चे ने दो सीरियाई लड़कों के साथ अपनी ही एक क्लासमेट का रेप किया। दो और बच्चों ने इस घटना को देखा लेकिन उनकी उम्र इतनी कम है कि पुलिस ने उनके बयान को वैध मानने से इंकार कर दिया। पुलिस का कहना है कि दोनों बच्चे इतने छोटे हैं कि वह कुछ समझ नही पाए और इसलिए उन्होंने अपने शिक्षकों को सूचित नहीं किया।

नहीं चल सका मुकदमा

बच्चा अफगानिस्तान से आये एक शरणार्थी परिवार का बताया जा रहा है। कोर्ट ने रेप के आरोपी इस 10 साल के अफगान शरणार्थी बच्चे पर केस चलाने से इनकार कर दिया। जर्मन मीडिया के अनुसार कोर्ट ने कहा कि हालांकि बच्चे का अपराध बेहद अपराध है लेकिन बच्चे की उम्र बहुत कम है इसलिए यह केस नहीं चलाया जा सकता है। प्रशासन ने इस केस को अब रद्द कर दिया है। बता दें कि जर्मनी में ऐसे अपराधों के ट्रायल के लिए न्यूनतम आयु 14 साल है।

कोर्ट ने बच्चे के स्कूल जाने पर रोक लगाई

हालांकि कोर्ट ने अफगान शरणार्थी बच्चे पर मुकदमा चलने के अनुमति नहीं दी लेकिन उसके स्कूल जाने पर रोक लगा दिया है। आरोपी बच्चे को अब विशेष संरक्षण में रखा जाएगा। उसकी नियमित जांच की जाएगी और इस बात का पता लगाया जाएगा कि वह किसी नकारात्मक प्रवृत्ति से तो पीड़ित नहीं है। बच्चे की मदद करनेवाले 2 अन्य बच्चों को भी दूसरे जिले के स्कूल में ट्रांसफर कर दिया गया है।

जर्मनी में शरणार्थियों के खिलाफ असंतोष बढ़ा

इस मामले के सामने आने के बाद जर्मनी में प्रवासियों को लेकर स्थानीय लोगों की नाराजगी बढ़ गई है। जर्मनी के कई हिस्सों में विदेशियों के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन हुए। आपको बता दें कि जर्मनी में बड़ी संख्या में अफगानिस्तान और सीरिया के शरणार्थी रहते हैं।

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