Mali attack: डोगन जातीय समूह पर हथियारबंद लोगों का हमला, 100 की मौत

Mali attack: डोगन जातीय समूह पर हथियारबंद लोगों का हमला, 100 की मौत

Anil Kumar | Publish: Jun, 11 2019 02:12:46 AM (IST) | Updated: Jun, 11 2019 11:37:49 AM (IST) विश्‍व की अन्‍य खबरें

  • माली के मध्य इलाके में डोगन जातीय समूह के लोग रहते हैं।
  • फुलानी जो कि अर्ध-घुमंतू चरवाहे हैं, पश्चिमी अफ्रीका में बसे हैं।
  • डोगन और फुलानी के बीच जातीय हिंसा अक्सर देखने को मिलती रही है।

बमाको। पश्चिमी अफ्रीकी देश माली में सोमवार को एक बीभत्स हत्याकांड की घटना सामने आई है। दरअसल, माली ( mali ) के मध्यक्षेत्र में बसे डोगन जातीय समूह ( Dogan ethnic group ) के एक गांव में कुछ हथियारबंद लोगों ने हमला कर दिया। इस हमले में 100 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि 95 शव बरामद हुए हैं और 30 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। स्थानीय और क्षेत्रीय सरकारी अधिकारियों ने कहा कि हथियारबंद लोगों का एक समूह सुबह सोना कोउबो में पहुंचा। सोना कोउबो गांव में डोगन ( Dogan ) जातीय समूह के सदस्य रहते हैं। हथियारबंद लोगों ने गांव को घेर लिया व घरों को आग लगा दी। इस दौरान लोग घरों में थे। संदिग्धों ने कथित तौर पर भागने की कोशिश करने वालों को गोली मार दी। हमलावरों ने किसी को भी नहीं बख्शा- महिलायें, बच्चे, बुजुर्ग सभी को मार दिया। अभी तक इस हमले की जिम्मेदारी किसी भी संगठन ने नहीं ली है। हालांकि माना जा रहा है कि यह हमला फुलानी समुदाय की ओर से अंजाम दिया गया है।

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डोगन-फुलानी संघर्ष क्या है?

डोगन लोग सदियों से केंद्रीय माली में रहते हैं और किसानों के रूप में एक बड़े पैमाने पर पारंपरिक जीवन जीते हैं। दूसरी ओर, कई फुलानी अर्ध-घुमंतू चरवाहे हैं, जो पश्चिम अफ्रीका में डोगन से दूरी बनाकर चलते हैं। लिहाजा किसानों और संसाधनों पर घूमने वाले चरवाहों के बीच संघर्ष लंबे समय से है। किसानों के बीच घर्षण और संसाधनों पर घूमने वाले झुंड लंबे समय से स्थायी हैं - लेकिन 2012 में उत्तरी माली में एक उग्रवादी इस्लामी विद्रोह के बाद से उनके बीच झड़पें बढ़ी हैं। दोनों ही समूहों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं।

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क्या यह हमला असामान्य है?

डोगन समूह पर यह हमला सामान्य नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि इस हमले में गांव में रहने वाले एक-तिहाई लोगों को मार दिया गया है। सोबाम दा पर हुए हमले में इसके एक तिहाई निवासी मारे गए हैं। इसी इलाके में मार्च में भी एक हमला किया गया था जिसमें 130 से अधिक फुलानी ( Fulani ) ग्रामीणों को हथियारबंद लोगों ने मार दिया था, जो कि पारंपरिक डोगन शिकारी के कपड़े पहनकर आए थे। इस हमले के बाद माली की सरकार ने 'डोगन दान ना अम्बासागौ' ( Dogon Dan Na Ambassagou ) पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालांकि इस संगठन ने खुद को एक आत्मरक्षा समूह बताया है और कहा है कि हत्याओं से इसका कोई लेना-देना नहीं है । उसने अपने हथियार डालने से इनकार कर दिया।

 

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