NASA को अंतरिक्ष में मिला लोहे का एस्टेरॉयड, बेचने पर हर आदमी को मिलेगा 9 करोड़ रुपये

HIGHLIGHTS:

  • एस्टेरॉयड ( Asteroid ) का व्यास 226 किलोमीटर है
  • इसका वजन धरती के चंद्रमा के वजन का करीब 1 फीसदी है
  • यह मंगल ग्रह और बृहस्पति ग्रह के बीच में मौजूद है

वाशिंगटन। अंतरिक्ष में नित्य नई-नई खोज करने को लेकर अमरीकी अंतरिक्ष एजेंस नासा लगातार प्रयासरत है। अब इसी कड़ी में नासा ने एक मूल्यवान एस्टेरॉयड (क्षुद्र ग्रह) की खोज करने का दावा किया है।

नासा ने दावा किया है कि ये एस्टेरॉयड पूरा का पूरा लोहे का बना है। यदि इस लोहे को बेचा जाए तो पूरी धरती में रहने वाले सभी लोग करोड़पति बन जाएंगे। यानी कि हर शख्स को करीब 9621 करोड़ रुपये ( एक करोड़ बिलियन पाउंड ) मिलेंगे।

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नासा ने अनुमान लगाया है कि एस्टेरॉयड पर मौजूद लोहे की कुल कीमत करीब 8000 क्वॉड्रिलियन पाउंड (8 हजार के पीछे 15 जीरो) है। बता दें कि नासा ने इस एस्टेरॉयड का नाम 16 साइकी (16 Psyche) रखा है।

एस्टेरॉयड तक पहुंचने की बनाई जा रही है योजना

आपको बता दें कि ब्रिटिश मैग्जीन द टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि छोटे से तारे (एस्टेरॉयड) की कीमत 8000 क्वॉड्रिलियन पाउंड (8,000,000,000,000,000,000 पाउंड) है। यदि इस लोहे को बेचा जाए तो इससे धरती के हर आदमी को 9621 करोड़ रुपये मिलेंगे।

रिपोर्ट में आगे नासा ने स्पेस एक्स के मालिक एलन मस्क से मदद मांगते हुए इस एस्टेरॉयड पर मौजूद लोहे की जांच के लिए अपने अंतरिक्षयान से मिशन शुरू करने की बात कही गई है।

इधर, इतने बड़े खनिज भंडार के तौर पर मिलने वाले एस्टेरॉयड को लेकर वैज्ञानिकों में खासा उत्साह है। हालांकि नासा ने कहा है कि फिलहाल इस एस्टेरॉयड को धरती के करीब लाने की कोई योजना नहीं है। लेकिन इसतक पहुंच कर इसमें मौजूद लोहे की जांच करने की योजना बनाई जा रही है।

एस्टेरॉयड तक आने-जाने में लगेंगे सात साल

इस एस्टेरॉयड के बारे में जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार यदि कोई स्पेस एक्स अपने अंतरिक्षयान से रोबोटिक मिशन इस एस्टेरॉयड पर भेजेगा, तो उसे वहां तक पहुंचने और अध्ययन कर लौटन में सात साल का वक्त लगेगा।

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इस एस्टेरॉयड का व्यास 226 किलोमीटर है। हमारे सौरमंडल के सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाने में इसे पांच साल (पृथ्वी के पांच साल के बराबर) लगता है। इस एस्टेरॉयड का एक दिन 4.196 घंटे का होता है।

इसका वजन धरती के चंद्रमा के वजन का करीब 1 फीसदी है, जो कि पूरे का पूरा लोहे का बना है। यह एस्टेरॉयड मंगल ग्रह और बृहस्पति ग्रह के बीच में मौजूद है।

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Anil Kumar
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