एंटीगुआ: मेहुल चोकसी के बारे में नहीं थी कोई सूचना, मुंबई पुलिस की क्लीयरेंस के बाद दिया गया पासपोर्ट

एंटीगुआ की एक सरकारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सीआईयू ने कहा कि निवेश अधिनियम 2013 द्वारा एंटीगुआ और बारबूडा की नागरिकता के लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ मई 2017 में चोकसी का आवेदन प्राप्त हुआ था।

एंटीगुआ। एंटीगुआ और बारबूडा की नागरिकता इकाई (सीआईयू) ने स्पष्ट किया है कि भारत के भगोड़े हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी को नागरिकता सभी प्रकार की जांचों के बाद दी गई है। एंटीगुआ सरकार के हवाले से आ रही मीडिया खबरों के अनुसार पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले के आरोपी मेहुल चोकसी को 'फिट और उचित' उम्मीदवार सुनिश्चित करने के बाद ही उसे नागरिकता दी गई है। सोमवार को भारत ने एंटीगुआ और बारबूडा सरकार से चोकसी की हर प्रकार की गतिविधि को रोकने का आग्रह किया था।

बता दें कि एंटीगा और बारबुडा के ‘सिटिजनशिप बाई इनवेस्टमेंट प्रोग्राम’ के तहत कोई भी व्यक्ति कम से कम एक लाख डॉलर का निवेश कर नागरिकता प्राप्त कर सकता है।

मुंबई पुलिस से मिला था क्लीयरेंस

एंटीगुआ की एक सरकारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सीआईयू ने कहा कि निवेश अधिनियम 2013 द्वारा एंटीगुआ और बारबूडा की नागरिकता के लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ मई 2017 में चोकसी का आवेदन प्राप्त हुआ था। रिपोर्ट में कहा गया है कि "भारत सरकार के विदेश मामलों के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय मुंबई ने चोकसी पुलिस क्लीयरेंस दी थी। मुंबई पुलिस ने कहा था कि चोकसी के खिलाफ उसके पास कोई प्रतिकूल जानकारी नहीं थी, जो उसे एंटीगुआ और बारबूडा के लिए वीज़ा समेत यात्रा सुविधाओं के लिए अयोग्य घोषित करती।"

नहीं थी एंटीगुआ को जानकारी

एंटीगुआ के कानून मंत्री स्टीड्रॉय बेंजमिन ने दावा किया है कि 2017 में जब मेहुल चोकसी ने नागरिकता के लिए आवेदन किया था तब भारतीय अधिकारियों ने कोई आपत्ति या रेड सिग्नल नहीं दिया था। एंटीगुआ सरकार द्वारा प्रकाशित बयान में सीआईयू ने यह भी कहा है कि चोकसी के आवेदन की कड़ी जांच के बाद आगे बढ़ाया गया था और सभी प्रकार के मूल्यांकन के बाद अंतिम निर्णय लिया गया था। सीआईयू ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें दो दस्तावेज प्राप्त हुए जिनमें 2014 और 2017 में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने चोकसी के स्वामित्व वाली कॉर्पोरेट इकाई पर जांच खोने का आग्रह किया था।

सीआईयू ने स्पष्ट किया कि यदि उस समय चोकसी के लिए उस समय वारंट करी किया जा चुका था तो उसकी सूचना पहले से ही इंटरपोल को उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी। यदि यह सूचना इंटरपोल के पास होती तो सीआईयू और अन्य सहयोगियों को आसानी से सुलभ हो सकती थी।

एंटीगुआ करेगा सहयोग

बता दें कि पंजाब नैशनल बैंक के 14,600 करोड़ रुपये के गबन में शामिल मेहुल चोकसी ने खुद इस बात को कबूला था कि वह एंटीगुआ में है। हालांकि भारत और एंटीगुआ के बीच फिलहाल प्रत्यर्पण संधि नहीं है। फिर भी एंटीगुआ के राष्ट्रपति ने कहा है कि वह इस मामले में हर प्रकार से भारत का सहयोग करेंगे।

Siddharth Priyadarshi Content
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