रूस के राष्ट्रपति क्यों चाहते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप फिर बनें अमरीका के राष्ट्रपति?

  • 2016 में राष्ट्रपति चुनाव डोनाल्ड ट्रंप ने जीता था
  • ट्रंप के ट्वीट औऱ भाषण विवादों को जन्म देते रहे हैं
  • ट्रंप के फिर राष्ट्रपति बनने में पुतिन का क्या फायदा

नई दिल्ली। पिछले 20 साल से व्लादिमीर पुतिन ( Vladimir Putin ) रूस की सत्ता में किसी न किसी रूप में भागीदार रहे हैं। लेकिन इस साल 2020 में उनकी पकड़ कुछ कमजोर पड़ती नजर आ रही है। इसकी एक बड़ी वजह है कोरोनावायरस ( coronavirus ) और तेजी से कमजोर होती अर्थव्यवस्था ( Economy )। रूस में 5 लाख से ज्यादा लोग कोरोनावायरस से पीड़ित हैं, जबकि 8,100 लोगों की जान ये खतरनाक वायरस ले चुका है। कोविड 19 के संक्रमण के बढ़ते मामलों के चलते ये कहना मुश्किल है कि अभी औऱ कितने लोग संक्रमित होंगे और कितने लोगों की जान जाएगी। रूस ( Russian ) की सरकार महामारी से संक्रमित लोगों को इलाज और बेरोजगारों को रोजगार देने में विफल साबित हो रही है। इस बीच कयास लगाए जाने लगे हैं कि पुतिन चाहते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप दोबारा अमरीका के राष्ट्रपति बनें।

कोरोनावायरस सबसे बड़ी समस्या

रूस के राष्ट्रपति ( Russian President ) व्लादिमीर पुतिन ( Vladimir Putin ) ने शुरू में कोरोनावायरस को गंभीरता से नहीं लिया। वह और उनके सहयोगी इसे महामारी भी नहीं मानते थे। जब इटली, स्पेन और ब्रिटेन इस महामारी से जूझते नजर आ रहे थे, तब पुतिन ने अपने देश के हालात बेहतर बताए थे। वह खुद सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करते थे और खुलेआम लोगों से हाथ मिलाते नजर आते थे। जब रूसी नागरिक बड़ी संख्या में संक्रमित होने लगे, तब कहीं जाकर पुतिन ने सोशल डिस्टेंसिंग ( Social distancing ) और लॉकडाउन ( lockdown )का सहारा लिया। अब कोरोनावायरस ( Coronavirus ) पर लगाम लगाना पुतिन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

रूसी अर्थव्यवस्था का संकट

कोरोनावायरस और तेल की कीमतों में भारी गिरावट की वजह से रूसी अर्थव्यवस्था चौपट-सी हो गई है। कभी अमरीका के साथ दुनिया में सुपर पावर का दर्जा रखने वाले रूस की अर्थव्यवस्था इतनी बदहाल हो गई है कि उसने 15 वर्षों में पहली बार मई के महीने में मासिक सकल घरेलू उत्पाद की रिपोर्ट तक जारी नहीं की। कोरोनावायरस पर रूसी सरकार की नीति ढुल-मुल रही, तो तेल की कीमतों को लेकर पुतिन ने सऊदी अरब के साथ प्राइस वॉर शुरू कर दी। कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट से रूस को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा है। साफ है कि सेहत के साथ अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर भी पुतिन को मुंह की खानी पड़ी है।

डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से पुतिन का फायदा

जब पुतिन की सभी योजनाएं गलत साबित हो रही थीं, तब अमरीका के राष्ट्रपति ( american president ) डोनाल्ड ट्रंप ( Donald Trump ) के बयानों और गतिविधियों से उन्हें अप्रत्याशित रूप से फायदा होने लगा। अमरीका में जब 2016 के राष्ट्रपति चुनाव हुए थे, तो पुतिन को ट्रंप की जीत की कोई उम्मीद नहीं थी, लेकिन 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में वह यह जरूर चाहते होंगे कि ट्रंप ही दोबारा राष्ट्रपति बनें।

ट्रंप के दोबारा अमरीकी राष्ट्रपति बनने में पुतिन का हित

राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले कार्यकाल में डोनाल्ड ट्रंप ने कई ऐसे कदम उठाए, जिनसे अनजाने में पुतिन को फायदा हुआ। यूक्रेन ( Ukraine ) के साथ रूस के संबंध खराब थे, इसलिए ट्रंप ने जब यूक्रेन के राष्ट्रपति को अमरीका में आमंत्रित न करके यूक्रेन के साथ संबंध खराब किए, तो इससे पुतिन सबसे ज्यादा खुश हुए होंगे। ट्रंप ने जर्मनी से 25 फीसदी अमरीकी सेना की वापसी की घोषणा की। तुर्की, मिस्र ( Egypt ) और इज़राइल ( Israel ) समेत मध्य-पूर्व एशिया में रूस को प्रभाव बढ़ाने की छूट दे दी। इससे रूसी जनता के सामने पुतिन को एक मजबूत नेता की छवि प्रस्तुत करने में मदद मिली। घरेलू राजनीति में इससे पुतिन को फायदा होगा। यही वजह है कि पुतिन भी चाहते हैं कि ट्रंप दोबारा अमरीका के राष्ट्रपति जरूर बनें।

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Manoj Sharma
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