पत्रिका फैक्ट चेक: जर्मनी ने चीन से कोरोना वायरस से हुए नुकसान के लिए 130 बिलियन पाउंड का हर्जाना मांगा, जानें सच्चाई?

पत्रिका फैक्ट चेक ने पाया कि अंग्रेजी न्यूज पेपर के वायरल हो रहे लेख की हेडलाइन भ्रामक और गुमराह करने वाला है। जर्मनी की सरकार ने चीन को ऐसा कोई बिल नहीं भेजा है।

नई दिल्ली। कोरोना वायरस से पूरी दुनिया जूझ रही है। चीन पर यह बीमारी फैलाने का आरोप लग रहा है। सोशल मीडिया पर इसके लिए जमकर चीन को कोसा जा रहा है। इसी बीच एक अंग्रेजी वेबसाइट ने खबर छापी है जिसमें दावा किया गया है कि जर्मनी ने चीन से कोरोना वायरस से हुए नुकसान का हर्जाना देने की मांग की है। जर्मनी ने चीन पर 130 बिलियन पाउंड का जुर्माना ठोका है।

दावा:- जर्मनी ने चीन से कोरोना वायरस से हुए नुकसान के लिए 130 बिलियन पाउंड का हर्जाना मांगा

तथ्य: जर्मन सरकार ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया

क्या है वायरल मैसेज ?

फेसबुक, ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया पर यह मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है कि कोरोना वायरस से हुए नुकसान के लिए जर्मनी ने चीन पर जुर्माना लगया है। पंकज चावला नाम के एक फेसबुक यूजर ने लिखा कि एंजेला मार्केल के जर्मनी ने कोरोना वायरस नुकसान के लिए चीन को 130 अरब पाउंड का चालान भेजा। भारत को चीन को कोरोनावायरस के लिए 300 अरब पाउंड का चालान भेजने की जरूरत है। इस खबर को शेयर करते हुए सोशल मीडिया यूजर्स तेजी से मांग कर रहे हैं कि भारत को तत्काल रूप से चीन से हर्जाना वसूलना चाहिए।

 

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ट्विटर पर भी एक यूजर ने लिखा कि जर्मनी ने कोरोना वायरस से हुए नुकसान के लिए 130 बिलियन डॉलर का चालान बीजिंग को भेजा है। फस्ट नेशन टू डू शो । इस महामारी के लिए विश्व को एक होकर चीन को जिम्मेदार ठहराना चाहिए और उसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

वायरल मैसेज की क्या है सच्चाई?

पत्रिका फैक्ट चेक ने गूगल पर इससे संबंधित की वर्ड्स डाले जिसमें पाया कि अंग्रेजी न्यूज पेपर के वायरल हो रहे लेख की हेडलाइन भ्रामक है। जर्मनी की सरकार ने चीन को ऐसा कोई बिल नहीं भेजा है। दरअसल, जर्मनी के एक टेबलॉयड न्यूजपेपर ने कोरोना वायरस के चलते जर्मनी के आर्थिक नुकसान का आकलन करते हुए मजाक के तौर पर चीन के नाम एक कच्चा बिल तैयार किया था। जिसमें कहा गया कि बर्लिन का चीन पर 130 बिलियन पाउंड बकाया है।

जर्मनी सरकार ने नहीं भेजा कोई बिल

इसमें जर्मनी सरकार की ओर से कोई बयान या बिल तैयार नहीं किया गया है। यानी वायरल हो रहे मैसेज बर्लिन ने बीजिंग पर कोई बिल नहीं भेजा है और ना ही जुर्माना लगाया है। सोशल मीडिया पर भ्रामक और गुमराह करने वाले मैसेज शेयर किए जा रहे हैं। पत्रिका अपने पाठकों से अपील करता है कि इस तरह के मैसेज पर ध्यान नहीं दें।

Prashant Jha
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