भारत से चुराई गईं थीं 800 साल पुरानी मूर्तियां, अमरीका ने वापस सौंपी

भारत से चुराई गईं थीं 800 साल पुरानी मूर्तियां, अमरीका ने वापस सौंपी

Siddharth Priyadarshi | Publish: Sep, 07 2018 10:56:38 AM (IST) | Updated: Sep, 07 2018 11:06:42 AM (IST) विश्‍व की अन्‍य खबरें

दोनों मूर्तियों की बाजार में कीमत 5 लाख डालर है।

न्यूयॉर्क। अमरीका ने भारत से चुराई गईं 800 साल पुरानी मूर्तियां वापस कर दी हैं। ये मूर्तियां अमरीका के दो संग्रहालयों में प्रर्दिशत करने के लिए रखी गई थीं। मूर्तियों की कीमत करोड़ों में आंकी गई है। दो अमरीकी संग्रहालयों में रखी गई ये मूर्तियां अति प्राचीन हैं।

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अमरीकी संग्रहालय में रखी गईं थीं मूर्तियां

ये दोनों मूर्तियां अमरीका के संग्रहालय में रखी गई थीं। पहली मूर्ति को ‘लिंगोधभवमूर्ति’ कहा गया है जो 12वीं सदी की बताई जा है। भगवान शिव की ग्रेनाइट निर्मित यह ऐतिहासिक मूर्ति चोल शासन की बताई जा रही है। बाजार में इसकी कीमत 225,000 डॉलर आंकी गई है। बताया जा रहा है कि इसे तमिलनाडु से चुराया गया था और अलबामा प्रान्त के बैरमिंघम संग्रहालय में प्रर्दिशत किया गया था।

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दूसरी मूर्ति एक बोधिसत्व ‘मंजूश्री’ की मूर्ति बताई जा रही है। यह भी मूर्ति 12 वीं सदी की है। बताया जा रहा है कि यह मूर्ति 1980 में बिहार में बोधगया के एक मंदिर से चुराई गयी थी। इसका वर्तमान मूल्य तकरीबन 2,75000 डॉलर आंका गया है।इसे उत्तरी कैरोलीना विश्वविद्यालय के आकलैंड आर्ट संग्रहालय में रखा गया था।

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महावाणिज्य दूत संदीप चक्रवर्ती को सौंपी गईं मूर्तियां

ये दोनों मूर्तियां न्यूयार्क में भारत के वाणिज्य दूतावास में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत के महावाणिज्य दूत संदीप चक्रवर्ती को सौंपीं गईं। बताया जा रहा है कि बोधिसत्व की मूर्ति के हाथ में तलवार है और यह मूर्ति पर सोने का पानी चढ़ाया गया है।चक्रवर्ती ने इस मौके पर अमरीका के प्रयास की सराहना की है। एचएसआई और न्यूयॉर्क जिला अटॉर्नी साइरस वेंस जूनियर के कार्यालयों की टीमों ने इस जटिल और बहुआयामी कार्य के लिए बेहद कठिन श्रम किया। एजेंसियों के संयुक्त प्रयास से इस "खजाने" को वापस भारत को सौंपने में बहुत मदद मिली। इसके अतिरिक्त भारत के राजस्व खुफिया विभाग की भी इस मामले को दोबारा शुरू करने और मामले की तह तक जाकर समाधान निकालने के लिए तारीफ हो रही है।

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