अब मोबाइल फोन तुरंत कर लेगा नकली सामान की पहचान

अब मोबाइल फोन तुरंत कर लेगा नकली सामान की पहचान

Anil Kumar Jangid | Publish: Nov, 01 2017 03:32:15 PM (IST) मोबाइल

मोबाइल फोन से भी अब नकली सामान की पहचान की जा सकेगी

अब मार्केट में बिक रही कौनसी चीज असली और कौनसी नकली इसकी पहचान आप चंद सेकेंड में ही कर सकेंगे। नकली सामान की पहचान करने में आपकी सहायता कोई और नहीं बल्कि आपका मोबाइल फोन करेगा। जी हां, अब आपका मोबाइल फोन जल्दी ही और ज्यादा स्मार्ट होने जा रहा है। आपका स्मार्टफोन आपको आपको बता देगा कि मार्केट में उपलब्ध कौनसी चीज असली है और कौन सी नकली। ऐसा संभव होगा आईआईटी, कानपुर के नैशनल सेंटर फॉर फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा बनाए गए एक अनोखे और दुनिया के पहले 'थ्री-डी सिक्यॉर ऑफलाइन टैग' से। इस टैग के पेटेंट के लिए एप्लाई भी किया जा चुका है और जल्द ही यह कई प्रोडक्ट्स पर नजर आने लगेगा।


मोबाइल फोन से होगी नकली सामान की पहचान
इस प्रोजेक्ट के हेड आईआईटी, कानपुर के मटीरियल साइंस डिपार्टमेंट के प्रफेसर दीपक है। उन्होंने बताया कि वो 2012-13 में इलेक्ट्रॉनिक चिप के प्रॉजेक्ट पर काम कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने सोचा कि चिप में स्टोर जानकारियों को पढ़ने के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक रीडर खरीदना होगा। लेकिन यह आम उपभोक्ताओं के लिए असुविधाजनक होगा। रीडर की जगह यह सुविधा मोबाइल फोन में उपलब्ध हो जाए तो काम बहुत ही आसान हो जाएगा। इसके लिए उन्होंने 2014 में आईआईटी, कानपुर के फ्लेक्स-ई सेंटर में अपनी टीम के साथ थ्री-डी टैग पर काम शुरू कर दिया। इसके बाद लगभग ढाई साल की कड़ी मेहनत के बाद यह टैग तैयार हुआ। इस टैग को विकसित करने वाली टीम में प्रफेसर दीपक और प्रफेसर मोनिका कटियार के अलावा सतीश चंद्रा, प्रणव अस्थाना, उत्कर्षा और प्रियंका हैं। उनके इस टैग में दवा, कीटनाशक और पर्सनल केयर प्रोडक्ट बनाने वाली कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है।

 

ऐसे काम करता है टैग
कंपनियां अपनी अच्छा के अनुसार इस टैग को खरीदेंगी। आईआईटी कैंपस में ही इसकी मार्केटिंग के लिए एक कंपनी बनाई गई है। इस टैग में प्रोडक्ट का नाम, कंपनी, बैच नंबर और एमआरपी आदि सभी जरूरी जानकारियां मौजूद होंगी। इस टैग की कीमत करीब पांच रुपए होगी। इस टैग को प्रोडक्ट पर लगाया जाएगा। ग्राहकों को टैग में मौजूद जानकारियां पढ़ने के लिए गूगल प्ले स्टोर से 10 एमबी का एक एप डाउनलोड करना होगा। टीम के सदस्य प्रणव अस्थाना का कहना है कि अभी यूज किए जा रहे कोड का ड्यूप्लिकेशन करना संभव है लेकिन इस टैग के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी।

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