जिस बीमारी पर खर्च होते थे 80 लाख रुपये तक, उसका मुफ्त इलाज शुरू

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री सरदार बलबीर सिंह सिद्धू ने की घोषणा, मोहाली में पहले मरीज का इलाज किया गया

By: Bhanu Pratap

Updated: 22 Jun 2020, 11:59 AM IST

मोहाली। हीमोफीलिया Haemophilia के मरीज़ों को बड़ी राहत प्रदान करते हुये पंजाब सरकार Punjab government ने राज्य भर के 18 इंटीग्रेटेड केयर सेंटर्स में हीमोफीलिया के मरीजों का एंटी हीमोफीलिया फैक्टर उपलब्ध करवा करके इलाज शुरू कर दिया गया है। इससे पहले हीमोफीलिया के इलाज के लिए मरीज़ों को लगभग 18 से 80 लाख रुपए तक सालाना ख़र्च करने पड़ते थे। यह सारा ख़र्च अब पंजाब सरकार की तरफ से किया जायेगा, जिसके लिए मरीजों की रजिस्ट्रेशन की जा रही है।

चौबीसो घंटे सुविधा

पंजाब के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री सरदार बलबीर सिंह सिद्धू ने बताया कि हीमोफीलिया का इलाज उपलब्ध करवाने के लिए कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की तरफ से राज्य के 18 जि़लों में इंटीग्रेटेड केयर सेंटर फॉर हीमोग्लोबीनोपैथी और हीमोफीलिया खोले गए हैं। तीन मेडिकल कालेज के इलावा 15 अन्य जिलों में शुरुआत की जा चुकी है। बाकी 4 जि़लों में भी जल्दी ही शुरुआत कर दी जायेगी। इन सेंटरों में होमीफीलिया के मरीजों को एंटी हीमोफीलिया फैक्टर 8, 9, 7 ए और एफ.ई.आई.बी.ए मुफ़्त उपलब्ध करवाए गए हैं और इन सेंटरों में 24&7 सुविधा उपलब्ध करवाई गई है,जिससे मरीजों को किसी भी समय इमरजेंसी के दौरान इलाज मुहैया करवाया जा सके।

चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया गया

स. सिद्धू ने बताया कि एंटी हीमोफीलिया फैक्टर के साथ इलाज करने के लिए स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण पीजीआई, चंडीगढ़ के माहिर डाक्टरों और वेबिनार के ज़रिये माहिरों द्वारा दिया गया है। पंजाब के बच्चों के माहिर डाक्टरों, मेडिकल स्पेशलिस्ट, स्टाफ नर्स और लैब टैक्नीशियन का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है जिससे मरीजों का सन्तोषजनक इलाज किया जा सके।

मोहाली में पहले मरीज का इलाज

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मोहाली जिले में पहले मरीज़ का इलाज किया गया है जो जिला अस्पताल मोहाली में स्थापित इंटीग्रेटेड केयर सेंटर फॉर हीमोग्लोबीनोपैथीस और हीमोफीलिया में एंटी हीमोफीलिक फैक्टर -8 के साथ इलाज किया गया। उन्होंने कहा कि उनको यह बताते हुये मान महसूस हो रहा है कि बाल रोगों के माहिर डॉ. डिम्पल श्रीवास्तव और फिजीशियन डॉ. ईशा अरोड़ा के द्वारा मोहाली में पहले हीमोफीलिया मरीज़ का किया इलाज किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले मरीजों को इलाज करवाने के लिए पीजीआई, चंडीगढ़ में जाना पड़ता था परन्तु अब यह इलाज सेवाएं पंजाब में उपलब्ध हैं जिससे जरूरतमंद मरीज़ों को बड़ी राहत मिलेगी।

500 मरीज़ हीमोफीलिया की बीमारी के शिकार

एडीशनल प्रोजेक्ट डायरेक्टर पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी और हीमोफीलिया और थैलासीमिया के स्टेट नोडल अफ़सर डॉ. मनप्रीत छतवाल ने बताया कि हीमोफीलिया के मरीज़ के ख़ून निकलने पर यह फैक्टर दिया जाता है। यह फैक्टर न मिलने के कारण मरीज़ की ब्लीडिंग ज़्यादा हो जाती है, जिस कारण कई बार मरीज़ को अपंगता का सामना करना पड़ता है और मौत का भी ख़तरा रहता है। इसलिए मरीजों के इलाज के लिए एंटी हीमोफीलिया फैक्टर उपलब्ध करवाए गए हैं जिससे मरीजों का समय पर पर सही इलाज किया जा सके। उन्होंने बताया कि पंजाब में लगभग 500 मरीज़ हीमोफीलिया की बीमारी के शिकार हैं और मरीजों के इलाज के लिए हर संभव इंतज़ाम पूरे कर लिए गए हैं।

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