नोटबंदी से गुस्साए ग्रामीण बोले, बच्चों को कहां फैंके

नोटबंदी से गुस्साए ग्रामीण बोले, बच्चों को कहां फैंके
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sandeep tomar | Publish: Dec, 09 2016 04:27:00 PM (IST) Moradabad, Uttar Pradesh, India

नोटबंदी के एक महीने बाद गांवों में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं

मुरादाबाद: भ्रष्टाचार और कालेधन पर लगाम लगाने की बात कहकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बीते महीने की आठ तारीख की आधी रात से देश भर में पांच सौ और एक हजार के नोट बंद कर दिए थे. उसके बाद से बे पटरी हुई जिन्दगी एक महीने बाद भी पटरी पर नहीं लौट पायी है. शहरों से लेकर देहात और कस्बों में बैंक और एटीएम के बाहर लोगों की लाइन कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. शहरों में कुछ लोगों ने वैकल्पिक व्यवस्था तो कर ली है, जैसे पेटीएम या डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड लेकिन गांव में अब हालात बिगड़ रहे हैं. ग्रामीण पहले तो फैसले पर सहमति जता रहे थे, लेकिन एक महिना बीतने के बावजूद स्थिति काबू में नहीं आने पर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं. टीम पत्रिका ने इसी का जायजा लिया रामपुर रोड स्थित गांव लक्ष्मीपुर कत्तई में यहां लोग अब भारी परेशानी में हैं.

गांव वाले हुए परेशान

नोट बंदी के फैसले के बाद जिस प्रकार पी एम् मोदी ने इससे आम आदमी को होने वाले फायदे गिनाये थे उसके विपरीत एक महीना बीतने के बाद भी गांव में स्थिति दयनीय हो गयी है. रोजमर्रा की उधारी इतनी हो चुकी है कि अब दुकानदार भी हाथ जोड़ रहा है. सहकारी बैंकों में पैसा नहीं है, ग्रामीण कई किलोमीटर चलकर शहर के बैंक और एटीएम में घंटों लाइन में लगकर भी निराश ही होते हैं. गांव के लल्लू सिंह के कहते हैं कि इतनी परेशानी उन्होंने जिन्दगी में कभी नहीं उठाई, बच्चों को कहां फेंक दें. आदेश कहते हैं कि कई बार एटीएम की लाइन में लग चूका हूं लेकिन हर बार निराश ही लौटा हूं. यही कहानी राशिद और सलीम की भी है. घर में राशन पानी भी खतम हो चूका है.

तुगली फरमान


उधर, जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन राजेश यादव ने नोटबंदी को तुगलकी फरमान बताया और कहा कि ग्रामीण समाज बुरी तरह से प्रभावित हुआ है, किसान परेशान है. बिना वैकल्पिक व्यवस्था के इतनी बड़ी आबादी के साथ ये जानलेवा मजाक किया गया है. उन्होंने कहा कि मैंने तो इसे लेकर प्रधानमंत्री को चिट्ठी भी लिखी है. लोगों की परेशानी देखी नहीं जा रही और सरकार ने सुनियोजित तरीके से सहाकरी बैंकों के हाथ बांध दिए.

ये लाइन कब खत्म होगी


कुल मिलाकर बीते एक महीने में शहर के साथ ग्रामीण हालात बेहद नाजुक स्थिति में पहुंच गये हैं, क्योंकि सरकार जो दावा कर रही है हकीकत में कहीं है ही नहीं. लोग यही कह रहे हैं कि काम छोड़कर कब तक लाइन में लगें और ये लाइन कब खत्म होगी इसका जबाब अब किसी के पास है नहीं.
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