कोरोना से मौत के पहले भाजपा नेता ने किया था मैसेज, 'यहां कोई डॉक्टर नहीं, ये मुझे मार देंगे...'

Highlights

- कोरोना से भाजपा के महानगर महामंत्री राकेश की मौत का मामला

- पति का मोबाइल देख पत्नी ने महानगर अध्यक्ष पर उठाए सवाल

- पत्नी का आरोप इलाज में गड़बड़ी हुई, जांच की जाए

By: lokesh verma

Published: 27 Sep 2020, 01:27 PM IST

मुरादाबाद. कटघर निवासी भाजपा के महानगर महामंत्री राकेश खरे की 8 सितंबर मंगलवार को कोरोना संक्रमण से मौत हो गई थी। अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, भाजपा नेता की मौत सुबह सात बजे हुई थी। अब उनके मोबाइल पर परिजनों ने एक वॉटसऐप मैसेज देखा है। इस मैसेज को राकेश खरे ने सोमवार और मंगलवार की दरम्यानि रात 2 बजे मुरादाबाद भाजपा महानगर अध्यक्ष धर्मेंद्र नाथ मिश्रा को सेंट किया था। इस मैसेज में लिखा था कि मुझे बचा लीजिए, आज की रात कठिन है, यहां कोई डॉक्टर नहीं है, ये लोग मुझे मार देंगे। परिजनों का आरोप है कि महानगर अध्यक्ष ने उनको इस मैसेज के बारे नहीं बताया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राकेश खरे की पत्नी का आरोप है कि इलाज में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने इस मैसेज की जांच की मांग की है।

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दरअसल, मरने से पांच घंटे पहले राकेश खरे ने इस मैसेज को भाजपा महानगर अध्यक्ष को भेजा था। जिसमें लिखा था कि अध्यक्ष जी, यहां यह स्थिति है कि कोई डॉक्टर नहीं है, सभी अपना रिसर्च कर रहे हैं। मुझे अच्छे में ही मार डालेंगे। मुझे बचा लीजिए, आज की रात कठिन है। बता दें कि भाजपा महानगर महामंत्री राकेश खरे कोरोना संक्रमण के चलते इलाज के लिए टीएमयू में भर्ती हुए थे। राकेश खरे की पत्नी लक्ष्मी ने बताया कि वह पति राकेश खरे का मोबाइल चेक कर रही थीं। इसी बीच उन्होंने महानगर अध्यक्ष को भेजा गया मैसेज देखा, जो उन्होंने मरने से कुछ घंटे पहले भेजा था। उनके इलाज में गड़बड़ी हुई है। इसकी जांच होनी चाहिए। वहीं, राकेश खरे के पिता का कहना है कि मेरा बेटा भाजपा का कर्मठ और जुझारू कार्यकर्ता था। परिवार में वही इकलौता कमाने वाला था। वह बेटे की मौत की जांच की मांग को लेकर भाजपा नेताओं और अधिकारियों से मिलेंगे।

महानगर अध्यक्ष ने दिया ये जवाब

राकेश खरे की पत्नी लक्ष्मी ने सवाल उठाया है कि इस मैसेज के बारे में महानगर अध्यक्ष ने उन्हें क्यों नहीं बताया? वहीं इसके जवाब में महानगर अध्यक्ष धर्मेंद्र नाथ मिश्रा ने कहा है कि हालात ऐसे नहीं थे। अगर वह परिजनों को मैसेज दिखाते तो वह और अधिक परेशान हो जाते। उन्होंने कहा कि राकेश खरे जैसे जुझारू कार्यकर्ता के जाने से पार्टी को बड़ा झटका लगा है। उनके इलाज में हमने किसी तरह की कोताही नहीं होने दी। डीएम से बात करने पर वह भी टीएमयू को राकेश खरे के अच्छे इलाज के लिए निर्देशित करते रहे। उन्होंने कहा कि राकेश के फेफड़े ठीक काम नहीं कर रहे थे। इस वजह से डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।

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