शरियत अदालतों पर रोक, मुस्लिम धर्म गुरुओं ने बताया गलत

शरियत अदालतों पर रोक, मुस्लिम धर्म गुरुओं ने बताया गलत
maulana raies ashraf

sandeep tomar | Publish: Dec, 20 2016 04:17:00 PM (IST) Noida, Uttar Pradesh, India

हाईकोर्ट ने शरियत अदालतों को गलत बताते हुए उन पर रोक लगा दी है

मुरादाबाद: शरियत कोर्ट को लेकर तमिलनाडु हाईकोर्ट के फैसले पर मुस्लिम धर्म गुरुओं ने ऐतराज जताया है और इसे एक तरफा फैसला बताते हुए वापस लेने की अपील की है. मुरादाबाद में आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्क्ष्य मौलाना रईस अशरफ ने कहा कि ये फैसल बिलकुल गलत है, कोर्ट को इस तरह की पाबंदी नहीं लगानी चाहिए. उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि शरीयत अदालतें एक तरह से सामान्य अदालतों की ही मदद करती हैं क्योंकि देश में तमाम अदालतों में लाखों की संख्या में वाद लंबित हैं और फैसल आने में भी सालों लग जाते हैं. इसलिए आम मुस्लिम अपने विवाद का निपटारा अगर शरियत कोर्ट करते हैं तो गलत क्या है.

कानून की मदद करती हैं शरियत अदालतें: मौलाना

मौलाना अशरफ ने कहा कि मुस्लिम समाज में कई तरह के मामूली विवाद हो जाते हैं जिन्हें मुफ़्ती के माध्यम से शरियत की रौशनी में निपटा दिया जाता है. अगर किसी को ऐतराज होता है तो वो हाईकोर्ट या न्यायलय चला जाता है. शरियत अदालतों पर पाबंदी लगाना कहीं तक सही नहीं है. उन्होंने कहा कि मैं सिर्फ पर्सनल लॉ बोर्ड का अध्क्ष्य ही नहीं तमाम मुस्लिम तंजीमो से जुड़ा हुआ हूं और मैं जिम्मेदारी से कोर्ट से अपील करूंगा की वो अपने फैसले को वापस ले.

तीन तलाक पर भी चल रहा विवाद


यहां बता दें कि मंगलवार को चैन्नई हाई कोर्ट ने एक मुकदमे की सुनवाई करते हुए स्थानीय मस्जिदों में संचालित शरियत अदालतों पर रोक लगा दी है. जिस पर प्रतिक्रिया भी मिलनी शुरु हो गयी हैं. ये फैसला ऐसे समय में आया है जब देश भर में तीन तलाक को लेकर भी पर्सनल लॉ बोर्ड और कानूनविदों में विवाद चल रहा है. बहरहाल कोर्ट के इस फैसले पर अभी कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं आई है.
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