धूमावती जयंती 2019: ऐसे करें देवी की पूजा,मिलेगा मन वांछित फल, सुहागन महिलाएं न करें पूजा

धूमावती जयंती 2019: ऐसे करें देवी की पूजा,मिलेगा मन वांछित फल, सुहागन महिलाएं न करें पूजा

Jai Prakash | Updated: 04 Jun 2019, 05:24:26 PM (IST) Moradabad, Moradabad, Uttar Pradesh, India

-दस विशेष महाविद्याओं का पूजन किया जाता है।

-सुहागन महिलायें ये पूजा नहीं कर सकतीं

मुरादाबाद: हिन्दू धर्म में कई प्रकार के त्यौहार और संस्कृति हैं, जिनसे मनुष्य को आध्यात्मिक लाभ मिलता है। शायद ही ऐसा कोई महिना हो जिसमें कोई महत्वपूर्ण पर्व न पड़ता हो। इन्हीं में से एक है 10 जून को पड़ने वाली मां धूमावती जयंती। मान्यता है कि इस दिन देवि की विधि विधान से पूजा करने पर हर मन्नत पूरी होती है। इस दिन दस विशेष महाविद्याओं का पूजन किया जाता है। सुहागन महिलायें ये पूजा नहीं कर सकतीं, मां की कृपा से पुत्र और पति दीर्घायु होते हैं।

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ये है मान्यता

पुराण अनुसार एक बार मां धूमावती अपनी क्षुधा शांत करने के लिए भगवान शंकर के पास जाती हैं किंतु उस समय भगवान समाधि में लीन होते हैं। मां के बार-बार निवेदन के बाद भी भगवान शंकर का ध्यान से नहीं उठते। इस पर देवी श्वास खींचकर भगवान शिव को निगल जाती हैं। शिव के गले में विष होने के कारण मां के शरीर से धुंआ निकलने लगा और उनका स्वरूप विकृत और श्रृंगार विहीन हो जाता है। इस कारण उनका नाम धूमावती पड़ता है।

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ये है कथा

देवी धूमावती जी की जयंती कथा पौराणिक ग्रंथों अनुसार इस प्रकार रही है- एक बार देवी पार्वती बहुत भूख लगने लगती है और वह भगवान शिव से कुछ भोजन की मांग करती हैं। उनकी बात सुन महादेव देवी पार्वती जी से कुछ समय इंतजार करने को कहते हैं ताकी वह भोजन का प्रबंध कर सकें। समय बीतने लगता है परंतु भोजन की व्यवस्था नहीं हो पाती और देवी पार्वती भूख से व्याकुल हो उठती हैं। क्षुधा से अत्यंत आतुर हो पार्वती जी भगवान शिव को ही निगल जाती हैं। महादेव को निगलने पर देवी पार्वती के शरीर से धुंआ निकलने लगाता है।तब भगवान शिव माया द्वारा देवी पार्वती से कहते हैं कि देवी , धूम्र से व्याप्त शरीर के कारण तुम्हारा एक नाम धूमावती होगा। भगवान कहते हैं तुमने जब मुझे खाया तब विधवा हो गई अत: अब तुम इस वेश में ही पूजी जाओगी। दस महाविद्यायों में दारुण विद्या कह कर देवी को पूजा जाता है।

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